
Digestion and Sleepiness: दोपहर का खाना खाने के बाद अक्सर आंखें भारी होने लगती हैं? ऑफिस में कंप्यूटर के सामने बैठे-बैठे नींद आने लगती है या घर पर खाना खाने के बाद बस थोड़ी देर लेटने का मन करता है। इसे आमतौर पर खाने के बाद आने वाली नींद या Postprandial Sleepiness कहते हैं। यह अक्सर किसी बीमारी का साइन नहीं होती। खाना खाने के बाद बॉडी में पाचन, हार्मोन और माइंड की एक्टिवनेस में कई बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से कुछ लोगों को सुस्ती महसूस होती है।
जैसे ही हम खाना खाते हैं, बॉडी का डाइनजेशन तंत्र एक्टिव हो जाता है। पेट और आंतें भोजन को तोड़ने और उससे पोषक तत्व निकालने का काम स्टार्ट करती हैं। इसी दौरान बॉडी में कई हार्मोन और सिग्नल एक्टिव होते हैं, जो भूख कम करने और पेट भरा हुआ महसूस कराने में हेल्प करते हैं। यही बदलाव कुछ लोगों में आराम और नींद जैसा एहसास पैदा करता है। इसे ऐसे समझें - आपने एक भारी लंच किया, पेट भर गया और उसके बाद बॉडी को आराम की जरूरत महसूस होने लगी। इसलिए ऑफिस में लंच के बाद आने वाली सुस्ती सिर्फ आपकी कल्पना नहीं है।
खाने के बाद नींद आने की एक वजह सिर्फ खाना नहीं है। हमारे बॉडी की अपनी Body Clock यानी Circadian Rhythm भी होती है। दिन में एक समय ऐसा आता है जब जागने की क्षमता स्वाभाविक रूप से थोड़ी कम हो सकती है। यही कारण है कि दोपहर के भोजन के बाद अगर आप पहले से कम सोए हैं, लगातार काम कर रहे हैं या सुबह से थके हुए हैं, तो नींद और ज्यादा महसूस होती है। नींद और भोजन दोनों बॉडी की एनर्जी और जागने-सोने की व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
कई लोगों में हां, खासकर जब खाना बहुत भारी हो। बड़ी मात्रा में भोजन करने के बाद पेट ज्यादा भरा हुआ महसूस होता है और पाचन तंत्र काफी एक्टिव हो जाता है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि हर बार ज्यादा कैलोरी खाने से नींद आ ही आएगी।
अक्सर लोग कहते हैं - चावल या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने से नींद आती है। यह बात कुछ हद तक सही है लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है। कुछ अध्ययनों में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन के बाद subjective sleepiness यानी खुद को ज्यादा नींद महसूस होने की बात सामने आई है। वहीं दूसरे रिसर्च में भोजन के अलग-अलग घटकों (Components) के बीच बहुत स्पष्ट अंतर नहीं मिला। इसलिए यह कहना कि “चावल खाते ही नींद आती है” सबपर लागू नहीं होता।
पूरी तरह तला-भुना या बहुत ज्यादा फैट वाला खाना खाने के बाद भी कुछ लोगों को ज्यादा सुस्ती महसूस हो सकती है। हाई-फैट भोजन के बाद 2-3 घंटे में लोगों ने ज्यादा नींद और थकान महसूस की थी। रिसर्चर ने इसे पाचन से जुड़े हार्मोन CCK (Cholecystokinin) में बदलाव से भी जोड़ा। उदाहरण के लिए, अगर कोई शक्स बहुत ज्यादा पूड़ी-सब्जी, तला भोजन, मिठाई और दूसरी भारी चीजें एक साथ खाता है, तो खाने के बाद सुस्ती महसूस हो सकता है।
ये भी पढ़ें- PIL क्या होता है? कोई आम नागरिक PIL कैसे दाखिल कर सकता है? PIL और सामान्य केस में क्या अंतर है?
विदेशों में एक लोकप्रिय धारणा है- टर्की खाने से नींद आती है क्योंकि उसमें Tryptophan नाम का अमीनो एसिड होता है। लेकिन सिर्फ टर्की को नींद का कारण मानना सही नहीं है। Harvard Health के अनुसार- सामान्य मात्रा में टर्की में मौजूद ट्रिप्टोफैन इतना नहीं होता कि अकेले उससे “नींद का हमला” हो जाए। बड़े और भारी भोजन के बाद आने वाली सुस्ती ज्यादा महत्वपूर्ण वजह हो सकती है।
अगर खाना खाने के बाद रोज बहुत ज्यादा सुस्ती आती है, तो लाइफ स्टाइल में कुछ बदलाव कर सकते हैं...
ये भी पढ़ें- FIR और NCR में क्या अंतर है? थाने में शिकायत के बाद FIR या NCR, कौन-सी रिपोर्ट कब दर्ज होती है?
कभी-कभार खाना खाने के बाद नींद आना आम बात हो सकती है। लेकिन अगर हर भोजन के बाद बहुत ज्यादा नींद आती है, दिनभर अजीब सी सुस्ती रहती है या पर्याप्त रात की नींद लेने के बावजूद बार-बार झपकी आती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ज्यादा दिन की नींद कभी-कभी किसी बॉडी के अंदर हो रही किसी गंभीर बीमारी का अलार्म हो सकता है।