
Snake Bite Myths and Facts: बरसात और उमस के मौसम में सांपों का निकलना और सर्पदंश के मामले अचानक बढ़ जाते हैं। ऐसे वक्त में अस्पताल भागने की बजाय बहुत से लोग अक्सर पुराने घरेलू टोटकों और सुनी-सुनाई बातों में कीमती वक्त गंवा देते हैं। इन्हीं में से एक नुस्खा है, काटे गए जगह पर पान में खाने वाला चूना लगा देना। लेकिन क्या सच में चूना लगाने से जहर उतर जाता है या ये महज एक जानलेवा अंधविश्वास है? मेडिकल साइंस की नजर से जानिए सांप के काटने से जुड़े वो 5 बड़े भ्रम, जो किसी की जान जोखिम में डाल देते हैं...
सच्चाई: ये पूरी तरह गलत और खतरनाक दावा है। चूने में ऐसा कोई रसायन नहीं होता, जो त्वचा के अंदर फैले जहर को बाहर खींच सके। उल्टा, चूना लगाने से त्वचा बुरी तरह जल जाती है (केमिकल बर्न), जिससे आसपास के टिशू सड़ने लगते हैं और इन्फेक्शन तेजी से फैलता है। डॉक्टरों को इलाज करने में भी भारी दिक्कत आती है।
सच्चाई: फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि जहां सांप ने काटा, उसके ऊपर रस्सी या तार बहुत कसकर बांध दिया जाता है। मेडिकल भाषा में इसे 'टूर्निकेट' कहते हैं। अगर खून का दौरा पूरी तरह रोक दिया जाए, तो उस अंग के खराब होने (गैंग्रीन) का खतरा बन जाता है और बाद में मरीज का हाथ या पैर काटना पड़ सकता है। केवल हल्का सहारा देकर अंग को स्थिर रखना चाहिए, खून का बहाव पूरी तरह नहीं रोकना चाहिए।
सच्चाई: ये तरीका भी जानलेवा है। ब्लेड या चाकू से चीरा लगाने पर गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है और बाहर का इन्फेक्शन सीधे नसों तक पहुंच जाता है। मुंह से जहर चूसने की कोशिश करने वाले के मुंह में अगर छोटा सा भी छाला या कट हुआ, तो जहर उसके शरीर में भी फैल सकता है।
सच्चाई: भारत में करीब 70 से 80 प्रतिशत सांप बिना जहर वाले (Non-venomous) होते हैं। जब ऐसा सांप काटता है, तो डर के अलावा कोई खतरा नहीं होता है। ऐसे में लोग तांत्रिक के पास जाते हैं और मरीज अपने आप ठीक हो जाता है, जिसका श्रेय झाड़-फूंक को मिल जाता है। लेकिन अगर जहरीले सांप जैसे कोबरा या करैत ने काटा हो, तो झाड़-फूंक में गंवाया हर एक मिनट मरीज को मौत के करीब ले जा सकता है।
सच्चाई: घाव पर सीधे बर्फ घिसने से नसें सुकड़ जाती हैं और लोकल टिशू डैमेज हो जाते हैं। किसी भी तरह की जड़ी-बूटी, गोबर या मिट्टी का लेप लगाने से टिटनेस और सेप्टिक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।