सूर्य ग्रहण न होता तो दुनिया को कभी नहीं मिलतीं ये 2 चीजें! आइंस्टीन से भी है गहरा कनेक्शन

Published : Aug 12, 2026, 10:01 AM ISTUpdated : Aug 12, 2026, 10:18 AM IST
Solar Eclipse

सार

Solar Eclipse 2026: सूर्य ग्रहण सिर्फ खगोलीय घटना नहीं है। इसके बिना दुनिया को 2 बड़ी खोजें नहीं मिलतीं। यह विज्ञान के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित हुआ है।

Solar Eclipse Science Discoveries: आज 12 अगस्त को आसमान में साल की बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक देखने को मिलेगी। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा और धरती के कुछ हिस्सों में दिन के समय रात जैसा अंधेरा नजर आएगा। भारत में यह नजारा नहीं दिखेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर सूर्य ग्रहण नहीं होता, तो दुनिया को विज्ञान की दो सबसे बड़ी खोजें कभी नहीं मिलतीं? महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का भी इससे बड़ा गहरा नाता है। आइए जानते हैं ये दोनों चीजें क्या हैं...

पहली बड़ी चीज हीलियम गैस (Helium Gas)

आज जो गैस उड़ने वाले गुब्बारों में भरी जाती है और जिसका इस्तेमाल रॉकेट साइंस से लेकर मेडिकल मशीनों में होता है, वो हीलियम (Helium) गैस है। इसकी खोज भी 1868 के सूर्य ग्रहण के दौरान ही सूरज की रोशनी का अध्ययन करते वक्त हुई थी। साल 1868 में वैज्ञानिक पियरे जूल्स सीज़र जैनसेन सूर्य ग्रहण देखने के दौरान सूर्य की रोशनी का स्पेक्ट्रम देख रहे थे। उन्हें एक ऐसी पीली स्पेक्ट्रल लाइन मिली, जो उस समय धरती पर मौजूद किसी तत्व से मेल नहीं खाती थी। बाद में वैज्ञानिकों ने इसे एक नए तत्व का संकेत माना और इसका नाम हीलियम रखा गया, जो ग्रीक शब्द Helios यानी सूर्य से आया है। दिलचस्प बात यह है कि हीलियम को धरती पर बाद में 1895 में विलियम रैम्जे ने पहचाना। यानी इंसानों को पहले इसका संकेत सूर्य में मिला और कई साल बाद पता चला कि यही तत्व धरती पर भी मौजूद है।

दूसरी चीज: आइंस्टीन की सबसे बड़ी थ्योरी हुई थी पास

1919 में लगे एक पूर्ण सूर्य ग्रहण ने ही दुनिया को बताया था कि अल्बर्ट आइंस्टीन सच बोल रहे हैं। उनकी मशहूर 'थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी' (सापेक्षता का सिद्धांत) को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण के दौरान ही तारों की फोटो खींची थी। अगर वो ग्रहण न लगता, तो आइंस्टीन की थ्योरी को साबित होने में शायद कई साल और लग जाते। साल 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने जनरल रिलेटिविटी यानी सामान्य सापेक्षता (General Relativity) पेश की। इस थ्योरी के मुताबिक, बहुत ज्यादा द्रव्यमान (Mass) वाली चीजें अपने आसपास के स्पेस-टाइम (Space-Time) को प्रभावित करती हैं और इसका असर रोशनी के रास्ते पर भी पड़ सकता है। लेकिन सवाल था, इसे साबित कैसे किया जाए? यहीं सूर्य ग्रहण काम आया।

सूर्यग्रहण और आइंस्टीन की थ्योरी का कनेक्शन

29 मई 1919 को हुए पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान ब्रिटिश वैज्ञानिक सर आर्थर एडिंगटन और उनकी टीम ने सूर्य के पास दिखाई देने वाले तारों की तस्वीरें लेने की कोशिश की। सामान्य दिन में सूर्य की तेज रोशनी के कारण उसके पास मौजूद तारों को देखना लगभग नामुमकिन था। पूर्ण ग्रहण ने कुछ समय के लिए सूर्य की चमक को ढक दिया और वैज्ञानिकों को इन तारों की स्थिति मापने का मौका मिला। आइंस्टीन की थ्योरी कहती थी कि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण उसके पास से गुजरने वाली तारों की रोशनी को थोड़ा मोड़ देगा। वैज्ञानिकों ने ग्रहण के दौरान तारों की तस्वीरें लेकर उनकी स्थिति की तुलना की और प्रकाश के मुड़ने के सबूत मिले। यही प्रयोग आइंस्टीन की 'जनरल रिलेटिविटी' को दुनिया के सामने रखने वाला ऐतिहासिक पल बना। इसके बाद आइंस्टीन अचानक दुनियाभर में बेहद पॉपुलर साइंटिस्ट बन गए।

PREV
Welcome to the Asianet News Hindi General Knowledge (GK) Hub, your go-to destination for amazing facts, interesting information, everyday science explainers, "Did You Know?" stories, curiosity-driven content, and answers to intriguing "Aisa Kyu?" questions. Explore fascinating insights about science, nature, history, technology, space, health, and the world around you—all explained in a simple and engaging way.
Read more Articles on

Recommended Stories

क्या सूर्य ग्रहण में सच में 'जहरीला' हो जाता है खाना? जानिए सालों पुरानी इस बात पर साइंस का जवाब
सूर्य ग्रहण का सबसे खूबसूरत नजारा ही सबसे बड़ा वैज्ञानिक रहस्य! जानें Corona की पूरी कहानी