
Solar Eclipse Explained: सूर्य ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य के सामने आता है, तो ऐसा लगता है जैसे आसमान में किसी ने सूर्य को ढक दिया हो। पहले सूर्य का छोटा हिस्सा छिपता है, फिर ज्यादा हिस्सा और Total Solar Eclipse में कुछ समय के लिए सूर्य का चमकता हुआ चेहरा पूरी तरह गायब हो जाता है। लेकिन कुछ ही देर बाद सूर्य फिर दिखाई देने लगता है। यहीं एक दिलचस्प सवाल पैदा होता है- ग्रहण खत्म होते ही चंद्रमा आखिर कहां चला जाता है? क्या वह अचानक सूर्य के सामने से हट जाता है? और सूर्य को फिर पूरा देखने में कितना समय लगता है?
इसका जवाब किसी रहस्यमयी घटना में नहीं, बल्कि चंद्रमा की लगातार चलती कक्षा, पृथ्वी के घूमने और चंद्रमा द्वारा बनाई गई छाया की स्पीड में छिपा है।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। सरल भाषा में इसे ऐसे समझें -
☀️ सूर्य → 🌑 चंद्रमा → 🌍 पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोकता है। इसकी वजह से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। इस छाया के 2 प्रमुख हिस्से होते हैं -
असल में ग्रहण के दौरान सूर्य कहीं नहीं जाता और न ही चंद्रमा अचानक गायब होता है। हमारी नजर से सूर्य का कुछ हिस्सा इसलिए छिपता है क्योंकि चंद्रमा हमारे और सूर्य के बीच आ जाता है।
इसे कुछ इस तरह समझते हैं...
☀️ सूर्य
↓ सूर्य की रोशनी
🌑 चंद्रमा
↘️
↘️ चंद्रमा की छाया
↘️
🌍 पृथ्वी
चंद्रमा की छाया पृथ्वी के जिस छोटे हिस्से पर पड़ती है, वहां ग्रहण दिखाई देता है। लेकिन चंद्रमा स्थिर नहीं है। वह पृथ्वी की कक्षा में लगातार घूम रहा है। साथ ही पृथ्वी भी अपनी धुरी पर घूम रही है। इसलिए चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर एक जगह स्थिर नहीं रहती, बल्कि तेजी से आगे बढ़ती है।
NASA के मुताबिक, चंद्रमा की छाया का umbra पृथ्वी पर अपेक्षाकृत छोटा क्षेत्र बनाता है, जबकि penumbra इससे काफी बड़ा होता है। चंद्रमा की कक्षीय गति और पृथ्वी के घूमने के कारण यह छाया पृथ्वी की सतह पर एक रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ती है।
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ग्रहण खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि चंद्रमा पृथ्वी के पास से चला गया। चंद्रमा तो अपनी कक्षा में लगातार घूमता रहता है। जैसे-जैसे चंद्रमा सूर्य के सामने से आगे बढ़ता है, उसका कोण बदलता जाता है। नतीजा यह होता है कि चंद्रमा अब सूर्य की रोशनी को उसी तरह नहीं रोक पाता।
1) सूर्य का थोड़ा हिस्सा छिपता है। चंद्रमा सूर्य के सामने आना शुरू करता है। सूर्य का एक हिस्सा ढक जाता है।
☀️ → 🌑
यह Partial Eclipse की शुरुआत है।
2) सूर्य का ज्यादा हिस्सा छिपता जाता है। चंद्रमा सूर्य की डिस्क के सामने और आगे बढ़ता है। सूर्य का दिखाई देने वाला हिस्सा लगातार छोटा होता जाता है।
3) Totality
अगर आप चंद्रमा की Umbra के रास्ते में हैं, तो एक समय ऐसा आता है जब चंद्रमा सूर्य की चमकती सतह को पूरी तरह ढक देता है। इसे Totality कहते हैं। इस दौरान सूर्य का चमकीला Photosphere छिप जाता है और मौसम व परिस्थितियां अनुकूल हों तो सूर्य का बाहरी वातावरण यानी Corona दिखाई दे सकता है।
4) चंद्रमा आगे निकल जाता है। अब चंद्रमा अपनी कक्षा में आगे बढ़ता रहता है। सूर्य का किनारा फिर दिखाई देने लगता है। पहले छोटा-सा चमकीला हिस्सा दिखता है, फिर वह बड़ा होता जाता है और आखिरकार सूर्य की पूरी डिस्क दोबारा दिखाई देने लगती है। यही Solar Eclipse का अंत है।
इसका कोई फिक्स टाइम नहीं होता। यह इस बात पर डिपेंड करता है कि आप ग्रहण के किस हिस्से में हैं और आपके स्थान से ग्रहण का रास्ता किस तरह गुजर रहा है। अगर सवाल Totality खत्म होने के बाद सूर्य के फिर पूरी तरह दिखाई देने का है, तो आम तौर पर कुछ समय तक Partial Eclipse जारी रहता है। यानी Totality खत्म होते ही सूर्य तुरंत पूरी तरह सामान्य नहीं दिखता। पहले चंद्रमा सूर्य की डिस्क से धीरे-धीरे हटता है और फिर कुछ समय बाद Partial Eclipse भी खत्म होता है।
पूरे Solar Eclipse का अनुभव- पहले Partial Phase से लेकर आखिरी Partial Phase तक- कई घंटों तक चल सकता है, जबकि किसी एक जगह पर Totality आम तौर पर सिर्फ कुछ मिनट या उससे भी कम रहती है। NASA के अनुसार- Total Solar Eclipse की कुल अवधि अलग-अलग परिस्थितियों में लगभग 10 सेकंड से 7.5 मिनट तक हो सकती है।
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नहीं। यह इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा भ्रम है। चंद्रमा ग्रहण के पहले भी पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा था और ग्रहण के बाद भी घूमता रहता है। ग्रहण केवल उस खास समय में बनता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की ज्यामिति ऐसी होती है कि चंद्रमा की छाया पृथ्वी के किसी हिस्से तक पहुंचती है। जैसे ही चंद्रमा आगे बढ़ता है, उसकी छाया भी पृथ्वी की सतह से आगे निकल जाती है। इसलिए अगर आप ग्रहण के बाद चंद्रमा को खोजें, तो वह गायब नहीं हुआ होगा। वह अपनी कक्षा में आगे बढ़ रहा होगा और सूर्य के मुकाबले उसकी आकाशीय स्थिति बदल चुकी होगी। जैसे - मान लीजिए आपके सामने एक तेज बल्ब है और उसके सामने आपने एक छोटी गेंद पकड़ रखी है।
💡 बल्ब → ⚫ गेंद → 👁️ आपकी आंख
जब गेंद ठीक बीच में आती है, तो बल्ब की रोशनी आपकी आंख तक नहीं पहुंचती। अब गेंद को थोड़ा आगे सरकाइए। बल्ब का किनारा दिखने लगेगा। और गेंद को और आगे ले जाइए। बल्ब पूरा दिखाई देने लगेगा। सूर्य ग्रहण में भी लगभग यही ज्यामितीय स्थिति होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां गेंद की जगह चंद्रमा है, बल्ब की जगह सूर्य और आपकी आंख की जगह पृथ्वी पर मौजूद पर्यवेक्षक।
क्योंकि यहां सिर्फ चंद्रमा ही नहीं चल रहा। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है और पृथ्वी खुद भी घूम रही है। इन गतियों की वजह से चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर लगातार अपना स्थान बदलती है। NASA के अनुसार, पूर्ण सूर्य ग्रहण की छाया पृथ्वी पर एक संकरी पट्टी में आगे बढ़ती है और ग्रहण का रास्ता कई घंटों में पृथ्वी की सतह पर लंबी दूरी तय कर सकता है। इसीलिए Total Eclipse किसी एक जगह पर कुछ मिनट का अद्भुत अनुभव हो सकता है, लेकिन उसी समय पृथ्वी के किसी दूसरे हिस्से में लोगों को सामान्य दिन का उजाला दिखाई दे सकता है।
सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या के समय ही संभव है, क्योंकि उस समय चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच होता है। लेकिन हर अमावस्या को ग्रहण नहीं लगता। कारण है- चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर कक्षा के तल से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश अमावस्याओं में चंद्रमा सूर्य के थोड़ा ऊपर या नीचे से निकल जाता है और उसकी छाया पृथ्वी से चूक जाती है। जब सही ज्यामितीय alignment बनता है, तभी सूर्य ग्रहण होता है।
12 अगस्त 2026 को Total Solar Eclipse होगा। NASA के अनुसार- इसकी Totality की पट्टी ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से गुजरती है। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में Partial Solar Eclipse दिखाई देगा।
चंद्रमा सूर्य के सामने आएगा → छाया पृथ्वी पर पड़ेगी → कुछ जगह Partial Eclipse → Totality के रास्ते में सूर्य पूरी तरह ढकेगा → चंद्रमा आगे बढ़ेगा → Totality खत्म होगी → Partial Phase जारी रहेगा → आखिर में सूर्य पूरी तरह दिखाई देने लगेगा।
सूर्य ग्रहण खत्म होते ही चंद्रमा कहीं नहीं जाता। वह अपनी सामान्य कक्षा में पृथ्वी का चक्कर लगाता रहता है। चंद्रमा के सूर्य के सामने से आगे बढ़ने पर उसकी छाया पृथ्वी से हट जाती है। पहले Totality खत्म होती है, फिर Partial Eclipse का चरण चलता है और अंत में चंद्रमा सूर्य की डिस्क से पूरी तरह हट जाता है। इसके बाद सूर्य सामान्य रूप से पूरा दिखाई देता है।