
Vande Mataram national song vs national anthem: 15 अगस्त 2026 को लाल किले से ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति ने एक ऐसा सवाल फिर सामने ला दिया है, जिसे लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है, जब भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, तो ‘वंदे मातरम’ का दर्जा क्या है? दोनों में अंतर क्या है और किसी सरकारी समारोह में दोनों बजें तो क्रम क्या होता है?
सबसे पहले सीधी बात समझिए। ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है, जबकि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है। ‘जन गण मन’ की रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी और इसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। दूसरी ओर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ‘वंदे मातरम’ आजादी के आंदोलन में एक शक्तिशाली प्रेरणा बनी और इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। दोनों की भूमिका अलग है, लेकिन राष्ट्रीय महत्व कम-ज्यादा नहीं। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में कहा था कि ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा दिया जाना चाहिए।
यही वह जानकारी है जो इस साल के स्वतंत्रता दिवस के बाद सबसे ज्यादा काम आएगी। सरकारी प्रोटोकॉल में जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों किसी कार्यक्रम में प्रस्तुत किए जाते हैं, तो ‘वंदे मातरम’ पहले और ‘जन गण मन’ बाद में होता है। 2026 के लाल किले समारोह में भी यही क्रम देखने को मिला।
ये भी पढ़ें- 1947 में भारत के पास क्या था और क्या नहीं? आबादी से बिजली तक जानें तब और आज का पूरा अंतर
ये भी पढ़ें- 15 अगस्त 1947 की सुबह कैसी थी? जब दुकानों पर तिरंगा, सड़कों पर भीड़ और हर चेहरे पर था आजादी का उत्साह
2026 में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक और बड़ा कानूनी बदलाव चर्चा में है। संसद में लाए गए संशोधन के जरिए राष्ट्रीय गीत को भी उस कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकना या उसमें बाधा डालना दंडनीय है। यानी लाल किले पर इस बार सुनाई दी धुन सिर्फ एक समारोह का हिस्सा नहीं थी। यह मौका देश के दो राष्ट्रीय प्रतीकों ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ की अलग-अलग भूमिका और साझा सम्मान को समझने का भी है।