
Sports Doping Explained: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को बड़ा झटका लगा है। डोपिंग टेस्ट में फेल होने के बाद जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। अरुण पुरुषों के 73 किग्रा वर्ग में भारत की तरफ से खेलने वाले थे। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) की रिपोर्ट के आधार पर इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन ने यह फैसला लिया। बता दें, जब भी कोई खिलाड़ी डोपिंग टेस्ट में फेल होता है, तो उसकी मेहनत, मेडल और करियर पर सवाल उठने लगता है। ओलंपिक, एशियन गेम्स, क्रिकेट, एथलेटिक्स या किसी भी बड़े टूर्नामेंट में डोपिंग टेस्ट एक नॉर्मल प्रोसेस है। बता दें, 1999 में World Anti-Doping Agency (WADA) की स्थापना हुई। आखिर डोपिंग टेस्ट होता क्या है? इसमें क्या चेक किया जाता है? खिलाड़ी इसमें डोपिंग टेस्ट में फेल क्यों हो जाता है? आइए जानते हैं...
डोपिंग टेस्ट एक साइंटिफिक जांच (scientific investigation) है, जिसमें यह पता लगाया जाता है कि किसी खिलाड़ी ने अपनी ताकत, सहनशक्ति, स्पीड या परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए कोई प्रतिबंधित (Banned) दवा या लिक्विड तो नहीं लिया। इसका मकसद यह फिक्स करना है कि सभी खिलाड़ी बराबरी के मैदान पर खेलें, कोई भी गलत तरीके से फायदा ना उठाए। यह ईमानदार खेल को बनाए रखने का सिस्टम है।
मान लीजिए 2 एथलीट 100 मीटर की दौड़ में भाग ले रहे हैं। एक खिलाड़ी सिर्फ मेहनत और एक्सरसाइज के दम पर दौड़ रहा है, जबकि दूसरा ताकत बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवा लेकर मैदान में उतरता है। ऐसी कंडीशन में मुकाबला बराबरी का नहीं रह जाता। यही वजह है दुनिया भर के खेल संगठनों ने डोपिंग पर सख्त रोक लगा रखी है।
डोपिंग टेस्ट आमतौर पर मुकाबले के दौरान (In Competition) और मुकाबले के बाहर (Out of Competition) दोनों समय हो सकता है। इस प्रोसेस में खिलाड़ी से मुख्य रूप से 2 तरह के सैंपल लिए जाते हैं।
1. यूरिन (Urine) सैंपलः सबसे ज्यादा यही टेस्ट किया जाता है। इससे कई तरह की प्रतिबंधित दवाओं का पता लगाया जा सकता है।
2. ब्लड (Blood) सैंपलः कुछ मामलों में खून का सैंपल लिया जाता है। इससे ब्लड डोपिंग, EPO जैसी दवाओं और अन्य पदार्थों की जांच होती है। इसके बाद सैंपल को सील करके रजिस्टर्ड लैब में भेजा जाता है।
डोपिंग टेस्ट के दौरान खिलाड़ी के सैंपल को 2 पार्ट में बांटा जाता है।
A Sample
B Sample
पहले A सैंपल की जांच होती है। अगर इसमें प्रतिबंधित पदार्थ मिलता है तो खिलाड़ी को सूचना दी जाती है। इसके बाद खिलाड़ी चाहे तो B सैंपल की जांच की मांग कर सकता है। अगर B सैंपल भी पॉजिटिव आता है, तो डोपिंग पर मुहर लग जाती है।
यह काम World Anti-Doping Agency (WADA) करती है। WADA हर साल Prohibited List जारी करती है, जिसमें उन दवाओं और मेथॉड (तरीका) की लिस्ट होती है जिनका यूज खिलाड़ियों के लिए प्रतिबंधित होता है। भारत में डोपिंग की जांच और नियमों को लागू करने का काम National Anti-Doping Agency (NADA) करती है।
अगर खिलाड़ी डोपिंग टेस्ट में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कई तरह के एक्शन हो सकते हैं। जैसे -
हां। कई बार खिलाड़ी बिना जानकारी के ऐसी दवा, सप्लीमेंट या एनर्जी प्रोडक्ट का यूज कर लेते हैं, जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ मिला होता है। हालांकि, खेल नियमों के अनुसार Strict Liability लागू होता है। यानी खिलाड़ी अपने शरीर में मिले हर पदार्थ के लिए खुद जिम्मेदार माना जाता है। इसी वजह से इंटरनेशनल लेबल के खिलाड़ी सिर्फ सर्टिफाइड सप्लीमेंट का ही यूज करते हैं।
1. नरसिंह यादव (कुश्ती) – 2016
रियो ओलंपिक से ठीक पहले डोप टेस्ट में फेल हुए। उनके सैंपल में प्रतिबंधित स्टेरॉयड मिला। उन्होंने दावा किया कि उनके खाने में साजिश के तहत प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया गया था। NADA ने पहले उन्हें राहत दी, लेकिन बाद में 4 साल का प्रतिबंध लग गया।
2. पृथ्वी शॉ (क्रिकेट) – 2019
भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ डोप टेस्ट में फेल पाए गए। उनके सैंपल में Terbutaline नाम का प्रतिबंधित पदार्थ मिला, जो आमतौर पर खांसी की दवा में होता है। BCCI ने उन्हें 8 महीने के लिए सस्पेंड किया। पृथ्वी शॉ ने कहा- उन्होंने बिना जांचे-परखे खांसी की सिरप ले ली थी।
3. एस. धनलक्ष्मी (स्प्रिंटर)
भारतीय महिला एथलीट एस. धनलक्ष्मी 2021 में भी डोपिंग मामले में चर्चा में रहीं, जिससे वे टोक्यो ओलंपिक नहीं खेल सकीं। बाद में दोबारा डोपिंग उल्लंघन के मामले में उन्हें लंबा प्रतिबंध झेलना पड़ा।
4. सीमा पुनिया (डिस्कस थ्रो)
2000 में सीमा पुनिया डोपिंग मामले में फंसी थीं। उनके करियर पर असर पड़ा, हालांकि, बाद में उन्होंने वापसी की और एशियाई खेलों व राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते।
5. अश्विनी अक्कुंजी (400 मीटर हर्डल्स)
2011 में भारतीय महिला एथलेटिक्स टीम के कई खिलाड़ियों के साथ डोप टेस्ट में फेल हुईं। उन पर प्रतिबंध लगाया गया।
6. रेणु बाला चानू (वेटलिफ्टिंग)
भारतीय वेटलिफ्टर रेणु बाला चानू डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाई गईं। उन्हें मुकाबलों से निलंबित किया गया।
7. संजीता चानू (वेटलिफ्टिंग)
2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट संजीता चानू का नाम डोपिंग विवाद में आया। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और सैंपल प्रोसेस पर सवाल उठाए। यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा।
8. हाल के मामले (2025–26)
हाल के वर्षों में कई भारतीय एथलीट अलग-अलग खेलों में डोप टेस्ट में फेल पाए हैं। इनमें एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल, पोलो और क्रिकेट के खिलाड़ी शामिल हैं। 2026 में स्प्रिंटर एस. धनलक्ष्मी, क्रिकेटर राजन कुमार समेत कई खिलाड़ियों पर NADA ने एक्शन लिया।
डोपिंग टेस्ट सिर्फ नियम लागू करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका मकसद है-
कॉन्टेन्ट सोर्सः World Anti-Doping Agency (WADA), National Anti-Doping Agency (NADA) India, International Olympic Committee (IOC), International Testing Agency (ITA)