
EPF Benefits: अगर आप किसी कंपनी में नौकरी करते हैं, तो आपने सैलरी स्लिप में EPF या Provident Fund (PF) लिखा जरूर देखा होगा। कई लोग जानते हैं यह सैलरी से कटने वाला पैसा है, लेकिन बहुत कम लोग समझते हैं यह फ्यूचर की आर्थिक सुरक्षा के लिए बनाया गया एक इमरजेंसी सेविंग फंड है। रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल सपोर्ट देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कुछ शर्तों के तहत इस पैसे का यूज भी किया जा सकता है। आइए जानते हैं EPF क्या है, यह कैसे काम करता है।
EPF (Employees' Provident Fund) एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) ऑपरेट करता है। इस प्लान का मकसद नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए लॉन्ग टर्म की सेविंग तैयार करना है, ताकि रिटायरमेंट के बाद उनके पास फाइनेंशियल सिक्युरिटी बनी रहे। आसान भाषा में कहें तो EPF एक ऐसा गुल्लक है, जिसमें हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता (Employer) मतलब कंपनी दोनों मिलकर पैसा जमा करते हैं।
हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (Basic + Dearness Allowance) का एक फिक्स पार्ट EPF अकाउंट में जमा होता है। साथ ही, नियोक्ता भी अपना हिस्सा जमा करता है। जमा राशि पर हर साल EPFO द्वारा फिक्स किया गया ब्याज भी मिलता है। जैसे - मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी ₹25000 है। हर महीने आपके EPF खाते में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा जमा होगा। यह अमाउंट कई सालों तक इंट्रेस्ट के साथ बढ़ता रहता है और रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड बन जाता है।
1. रिटायरमेंट के लिए सेविंगः नौकरी के दौरान छोटी-छोटी मंथली बचत समय के साथ बड़ा फंड बन सकती है।
2. ब्याज का फायदाः EPF में जमा राशि पर हर साल इंट्रेस्ट मिलता है। इससे आपकी बचत केवल जमा नहीं रहती, बल्कि समय के साथ बढ़ती भी है।
3. जरूरत पड़ने पर निकासीः EPFO के नियमों के अनुसार, घर खरीदने, इलाज, शिक्षा, शादी या कुछ अन्य परिस्थितियों में पैसा भी निकाला जा सकता है।
4. आर्थिक अनुशासनः क्योंकि पैसा हर महीने अपने-आप डिपॉजिट होता है, इसलिए नियमित बचत की आदत बनती है।
5. टैक्स लाभः इनकम टैक्स नियमों के तहत EPF में इन्वेस्ट और उस पर मिलने वाले प्रॉफिट पर कुछ रियायत भी मिलती है।
कई लोग EPF और PPF को एक जैसा समझते हैं, लेकिन दोनों अलग स्कीम्स हैं।
EPFO हर फाइनेंशियल ईयर के लिए इंट्रेस्ट रेट फिक्स करता है। यह रेट केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की सिफारिश पर केंद्र सरकार के अप्रूवल के बाद लागू होती है। 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट रेट है 8.25% है।
| साल | ब्याज दर |
| 2025-26 | 8.25% |
| 2024-25 | 8.25% |
| 2023-24 | 8.25% |
| 2022-23 | 8.15% |
| 2021-22 | 8.10% |
| 2020-21 | 8.50% |
| 2019-20 | 8.50% |
| 2018-19 | 8.65% |
| 2017-18 | 8.55% |
| 2016-17 | 8.65% |
| 2015-16 | 8.80% |
| 2014-15 | 8.75% |
| 2013-14 | 8.75% |
| 2012-13 | 8.50% |
| 2011-12 | 8.25% |
| 2010-11 | 9.50% |
मान लीजिए हर महीने EPF में कुल डिपॉजिट (कर्मचारी + नियोक्ता का EPF हिस्सा) = ₹10,000
अवधि = 20 साल
एवरेज ब्याज = 8.25% हर साल
टेन्टेटिव कुल अमाउंट कुछ इस प्रकार होगा...
कुल डिपोजिट अमाउंट: ₹24,00,000
अनुमानित ब्याज: लगभग ₹35–38 लाख
कुल EPF कॉर्पस: लगभग ₹59–62 लाख
नोटः यह एक अनुमान है। ब्याज के ऊपर-नीचे होने पर टोटल अमाउंट कम-ज्यादा हो सकता है। बता दें, नियोक्ता के 12% योगदान का पूरा हिस्सा EPF में नहीं जाता है, उसका एक पार्ट EPS (पेंशन) में जाता है।
(कंटेंट सोर्सः EPFO, Ministry of Labour & Employment, Government of India, Income Tax Department, PF Scheme 1952, EPFO Annual Report)