
Hindu eclipse rules: हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रहण को लेकर कई परंपराएं और मान्यताएं चली आ रही हैं। ग्रहण के समय पूजा-पाठ, भोजन, मंत्र जाप और रोजाना के काम को लेकर कई नियम बताए गए हैं। सवाल उठता है- ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए? इसके पीछे क्या मान्यता है? आइए जानते हैं।
ये भी पढ़ें-
मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? क्या सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा एक जैसी होती है? क्यों शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं होती?
ग्रहण तब होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक विशेष स्थिति में आ जाते हैं।
- जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो इसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
- जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
ये भी पढ़ें-
अभिजीत मुहूर्त क्या है? अभिजीत मुहूर्त में क्यों किए जाते हैं शुभ काम? जानें अभिजीत मुहूर्त का रहस्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का प्रभाव माना जाता है। इसलिए इस दौरान कुछ कामों से बचने की सलाह दी जाती है। परंपराओं में ग्रहण को साधना, मंत्र जाप और आत्मचिंतन का समय माना गया है।
1. खाना खाने से बचना चाहिए...
ग्रहण के समय भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है- ग्रहण के दौरान भोजन शुद्धता नहीं रह जाता है। इस वजह से पुराने समय में लोग ग्रहण शुरू होने से पहले खाना खा लेते थे। कई घरों में ग्रहण के समय खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं।
2. देव प्रतिमाओं को छूने से बचना
कई धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के समय मंदिर के कपाट बंद रखने और भगवान की मूर्तियों को न छूने की मान्यता है। ग्रहण के दौरान पूजा स्थान की विशेष शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके पूजा करने की परंपरा भी है।
3. शुभ कार्य शुरू करने से बचना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार- ग्रहण के समय शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नया बिजनेस-व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। लोग शुभ कामों के लिए ग्रहण समाप्त होने के बाद का समय देखते हैं।
4. नकारात्मक विचारों से बचना
ग्रहण का समय आत्मचिंतन और भगवान के ध्यान का समय माना जाता है। इस दौरान क्रोध, झगड़ा और गलत विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
5. बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए
कई धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के समय बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। ग्रहण के समय शरीर और मन को शांत रखना चाहिए और धार्मिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
ग्रहण से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध धार्मिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। भागवत पुराण के अनुसार- समुद्र मंथन के बाद जब अमृत निकला, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत बांटा। कथा के अनुसार- स्वरभानु नाम का असुर देवता का रूप बनाकर अमृत पीने पहुंच गया। सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान भगवान विष्णु को बता दी। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। चूंकि स्वरभानु ने अमृत पी लिया था, इसलिए वह मरा नहीं है। उसका सिर राहु कहलाया और धड़ केतु। इसी कारण राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को प्रभावित करते हैं, जिसे ग्रहण कहा जाता है।
- मंत्र जाप करना
- भगवान का ध्यान करना
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना
- दान करना
- ईश्वर का स्मरण करना
कई लोग ग्रहण के समय महामृत्युंजय मंत्र और भगवान के नाम का जाप करते हैं।
- स्नान किया जाता है।
- घर की सफाई की जाती है।
- पूजा स्थान को शुद्ध किया जाता है।
- भगवान की पूजा की जाती है।
- जरूरतमंदों को दान दिया जाता है।