Temple Parikrama Rules: जानिए मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं होती और गणेश, दुर्गा, विष्णु की प्रदक्षिणा के नियम।
Temple Parikrama Rules: मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करना केवल पूजा नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का माध्यम है। मंदिर में दर्शन के बाद भक्त भगवान की परिक्रमा करते हैं। मान्यता है- भगवान की परिक्रमा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त को ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। लेकिन मन में सवाल आता है मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? क्या हर देवी-देवता की परिक्रमा की संख्या अलग होती है? धर्म में अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की संख्या अलग बताई गई है।
परिक्रमा क्या होती है?
भगवान की मूर्ति या मंदिर के चारों ओर दाईं ओर से घूमना परिक्रमा या प्रदक्षिणा कहलाता है। ‘प्रदक्षिणा’ शब्द का मतलब है- भगवान को अपने दाहिने ओर रखते हुए घूमना। मान्यता है- भगवान को केंद्र मानकर परिक्रमा करना यह दिखाता है कि जीवन का सेंटर प्वाइंट सिर्फ ईश्वर हैं।
मंदिर में सामान्य रूप से कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
सामान्य रूप से किसी भी देवी-देवता की 1, 3, 5, 7 या 11 परिक्रमा करना चाहिए। यह संख्या भगवान और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
अलग-अलग देवी-देवताओं की परिक्रमा संख्या
1. भगवान गणेश की परिक्रमा
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। गणेश जी की 3 परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। कथा के अनुसार- एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश और कार्तिकेय से कहा- जो पूरी दुनिया की परिक्रमा करके पहले आएगा, वही विजेता होगा। कार्तिकेय जी संसार की यात्रा पर निकल गए, लेकिन गणेश जी ने माता-पिता की 3 बार परिक्रमा करके कहा- मेरे लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं। इसके बाद माता-पिता को सबसे बड़ा सम्मान दिया गया।
2. भगवान शिव की परिक्रमा
भगवान शिव की पूजा में परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है। कई परंपराओं में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने की मान्यता है। मान्यता है- शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा (सोमसूत्र) को पार नहीं करना चाहिए।
3. माता दुर्गा की परिक्रमा
मां दुर्गा की पूजा में कई भक्त 3 या 9 परिक्रमा करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में देवी की परिक्रमा करने की परंपरा विशेष रूप से देखी जाती है।
4. भगवान विष्णु और कृष्ण की परिक्रमा
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में भी परिक्रमा को शुभ माना गया है। कई वैष्णव परंपराओं में भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हुए भगवान का नाम लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिक्रमा करते समय -
- मन में भगवान का ध्यान रखना चाहिए।
- जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
- शांत भाव से परिक्रमा करनी चाहिए।
- भगवान का नाम या मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
- परिक्रमा हमेशा दाईं ओर से शुरू करने की परंपरा है।


