क्या हर कोई पहन सकता है तुलसी की माला? भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी से जुड़ी 7 रोचक मान्यताएं

Published : Aug 02, 2026, 01:00 PM IST
Who Can Wear Tulsi Mala

सार

Who Can Wear Tulsi Mala: क्या हर कोई तुलसी की माला पहन सकता है? जानें सनातन धर्म में तुलसी माला पहनने के नियम, महत्व, सावधानियां और धार्मिक मान्यताएं क्या हैं?

Tulsi Mala Rules: सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि मां तुलसी का स्वरूप माना गया है। तुलसी भगवान विष्णु को सबसे ज्यादा प्रिय हैं। यही वजह है वैष्णव परंपरा में तुलसी की माला का खास महत्व बताया गया है। सवाल है क्या तुलसी की माला हर कोई पहन सकता है? क्या इसके लिए कोई खास नियम हैं? आइए जानते हैं।

तुलसी की माला का धार्मिक महत्व

धर्मग्रंथों के अनुसार- तुलसी भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीराम की प्रिय हैं। इसलिए तुलसी की लकड़ी से बनी माला को धारण करना भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। वैष्णव संप्रदाय के संत और भक्त अक्सर गले में तुलसी की माला पहनते हैं। इसे भगवान की शरण और सही कामों की याद दिलाने वाला धार्मिक चिह्न भी माना जाता है।

तुलसी की माला कौन पहन सकता है?

तुलसी की माला पहनने पर किसी जाति, उम्र या लिंग का बंधन नहीं है।

  • पुरुष पहन सकते हैं।
  • महिलाएं पहन सकती हैं।
  • बुजुर्ग और युवा दोनों पहन सकते हैं।
  • भगवान विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण के भक्त इसे पहन सकते हैं।

ये भी पढ़ें- सोमवार, गुरुवार और शनिवार को बाल क्यों नहीं कटवाने चाहिए? गलत दिन बाल कटवाने से क्या होता है?

क्या तुलसी की माला पहनने के कुछ नियम हैं?

1. साफ मन के साथ तुलसी की माला पहनें

तुलसी की माला सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था का प्रतीक भी है। इसलिए इसे फैशन के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा से पहनना चाहिए।

2. साफ-सफाई का ध्यान रखें

माला पहनने वाला व्यक्ति अपने आचरण और स्वच्छता का ध्यान रखे। यह धार्मिक अनुशासन का हिस्सा माना जाता है।

3. भगवान को याद करें

कई वैष्णव परंपराओं में तुलसी की माला पहनते समय भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का नाम लेना चाहिए।

क्या महिलाएं तुलसी की माला पहन सकती हैं?

हां। महिलाएं भी तुलसी की माला पहन सकती हैं। कई मंदिरों और वैष्णव परंपराओं में महिलाएं रेगुलर रूप से तुलसी की माला पहनती हैं।

तुलसी की माला पहनने का मकसद क्या है?

  • भगवान विष्णु के प्रति भक्ति जताना।
  • मन को ईश्वर की ओर लगाना।
  • धार्मिक जीवन की याद बनाए रखना।
  • सात्विक जीवन जीने का संकल्प लेना।

क्या तुलसी की माला उतारनी चाहिए?

अलग-अलग नियम हैं। कई वैष्णव संप्रदाय इसे हमेशा पहनने की सलाह देते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में विशेष परिस्थितियों में इसे उतारने की बात कही जाती है।

ये भी पढ़ें- कौन-से दिन नाखून नहीं काटना चाहिए? नाखून काटने को लेकर हिंदू धर्म में क्या नियम हैं?

तुलसी से जुड़ी प्रचलित कथाएं क्या हैं...

1. वृंदा और भगवान विष्णु की कथा

यह कथा पद्म पुराण, स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में अलग-अलग रूपों में मिलती है। कथा के अनुसार, वृंदा दैत्यराज जलंधर की पतिव्रता पत्नी थीं। उनके सतीत्व के प्रभाव से जलंधर को कोई देवता हरा नहीं कर पा रहा था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा की तपस्या भंग कर दी। इससे जलंधर की शक्ति समाप्त हो गई और भगवान शिव ने उसका वध कर दिया।

सच जानने पर वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि वे पत्थर बन जाएंगे। इसी शाप से शालिग्राम स्वरूप प्रकट हुआ। बाद में वृंदा ने देह त्याग दी और उनके तप से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। इसी कारण तुलसी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माना जाता है।

2. तुलसी विवाह की कथा

वृंदा की कथा से ही तुलसी विवाह की परंपरा जुड़ी है। मान्यता है भगवान विष्णु ने वृंदा को वरदान दिया कि वे तुलसी के रूप में सदा पूजनीय रहेंगी और बिना तुलसी के उनकी पूजा अधूरी मानी जाएगी। हर साल कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) से तुलसी-शालिग्राम विवाह कराया जाता है। इसके बाद हिंदू धर्म में विवाह जैसे मांगलिक कार्य शुरू होते हैं।

3. समुद्र मंथन से जुड़ी मान्यता

समुद्र मंथन के समय निकले दिव्य तत्वों में तुलसी को भी विशेष स्थान मिला। तुलसी में देवी लक्ष्मी का अंश माना जाता है, इसलिए जहां तुलसी होती है, वहां सुख-समृद्धि और पॉजिटिविटा का निवास होता है।

4. भगवान कृष्ण और तुलसी दल की कथा

वैष्णव परंपरा में एक प्रसिद्ध कथा है- एक बार भगवान श्रीकृष्ण को सोने-चांदी और रत्नों से तौला गया, लेकिन पलड़ा बराबर नहीं हुआ। तब रुक्मिणी ने श्रद्धा से सिर्फ एक तुलसी दल भगवान को चढ़ाया। उसी वक्त तराजू बराबार हो गया।

5. यमराज और तुलसी की मान्यता

एक और मान्यता है कि जिस घर में हर दिन तुलसी की पूजा होती है, वहां नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। तुलसी के पास दीपक जलाने और जल चढ़ाने से परिवार पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

6. तुलसी और भगवान विष्णु की पूजा

भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शालिग्राम की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी वजह से मंदिरों और घरों में भगवान को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता जरूर रखा जाता है।

7. तुलसी और घर की पवित्रता

भारतीय घरों में तुलसी लगाने की परंपरा है। तुलसी घर में पॉजिटिव वातावरण, शुद्धता और आध्यात्मिक एनर्जी का प्रतीक है। वहीं आयुर्वेद में भी तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है।

PREV
Welcome to the Asianet News Hindi General Knowledge (GK) Hub, your go-to destination for amazing facts, interesting information, everyday science explainers, "Did You Know?" stories, curiosity-driven content, and answers to intriguing "Aisa Kyu?" questions. Explore fascinating insights about science, nature, history, technology, space, health, and the world around you—all explained in a simple and engaging way.
AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
Read more Articles on

Recommended Stories

A, B का पिता है...क्या बता सकते हैं D का B से क्या रिश्ता है? सॉल्व करें 10 ट्रिकी Blood Relation Questions
क्या घर में मोर पंख रखना शुभ होता है? भगवान कृष्ण के मुकुट में क्यों था मोर पंख? जानें सबकुछ...