Why Lord Ganesha Likes Modak: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। गणपति की प्रतिमाओं में भी कई बार उनके हाथ में मोदक दिखाई देता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर गणेश जी को मोदक ही क्यों प्रिय माना जाता है? जानिए पौराणिक कथा।
एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं ने माता पार्वती को एक दिव्य मोदक दिया था। जब गणेश जी को इस मोदक के विशेष गुणों के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे पाने की इच्छा जताई। कथा में आगे बताया जाता है कि गणेश जी को वह मोदक प्राप्त हुआ और तभी से उन्हें मोदक प्रिय माना जाने लगा। इस कथा का उल्लेख कुछ धार्मिक परंपराओं में मिलता है, हालांकि अलग-अलग स्रोतों में इसकी कथा अलग रूप में भी मिलती है।
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एक दांत टूटने से भी जोड़ी जाती है मान्यता
एक अन्य प्रचलित कथा भगवान गणेश और परशुराम से जुड़ी है। कथा के अनुसार, दोनों के बीच हुए संघर्ष में गणेश जी का एक दांत टूट गया। इसी वजह से ऐसी मान्यता कही जाती है कि उन्हें नरम और आसानी से खाए जाने वाले मोदक पसंद आए। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसे ऐतिहासिक तथ्य नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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‘मोदक’ शब्द का अर्थ भी है खास
मोदक को केवल मिठाई नहीं माना जाता। धार्मिक व्याख्याओं में इसे आनंद, प्रसन्नता और ज्ञान से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि गणेश पूजा में मोदक का भोग लगाने की परंपरा आज भी बेहद लोकप्रिय है।
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गणेश चतुर्थी पर भक्त बप्पा को अर्पित करते हैं मोदक
यही कारण है कि गणेश चतुर्थी पर भक्त बप्पा को मोदक अर्पित करते हैं और फिर इसे प्रसाद के रूप में परिवार के लोगों में बांटते हैं। यानी गणेश जी का मोदक प्रेम सिर्फ स्वाद की कहानी नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और पौराणिक परंपरा से जुड़ी मान्यता भी है।
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