
बारिश की शुरुआत सूर्य से होती है। सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों, झीलों और तालाबों का पानी गर्म होकर जलवाष्प (Water Vapor) में बदल जाता है। इस प्रोसेस को वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं। सिर्फ पानी ही नहीं, पेड़-पौधे भी अपनी पत्तियों के जरिए हवा में नमी छोड़ते हैं। इसे वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहते हैं। ये दोनों मिलकर एनवायरमेंट में जलवाष्प की मात्रा बढ़ाते हैं।
जलवाष्प हल्की होने की वजह से ऊपर उठती है। ऊंचाई पर हवा का टेंप्रेचर कम होता है। ठंडी हवा मिलने पर जलवाष्प छोटे-छोटे पानी की बूंदों या बर्फ के कणों में चेंह होने लगती है। इस प्रोसेस को संघनन या कंडेंसेशन (Condensation) कहते हैं। यह वह प्रोसेस है जिसमें कोई गैस या वाष्प (जैसे जलवाष्प) ठंडी होकर वापस पानी में बदल जाती है। लाखों-करोड़ों छोटी बूंदें मिलकर बादल बनाती हैं। शुरुआत में ये बूंदें बहुत हल्की होती हैं, इसलिए हवा उन्हें ऊपर संभाले रखती है।
समय के साथ बादलों के अंदर मौजूद छोटी-छोटी बूंदें आपस में टकराकर बड़ी होने लगती हैं। जब उनका वजन इतना बढ़ जाता है कि हवा उन्हें संभाल नहीं पाती, तब वे धरती पर गिरने लगती हैं और इसी को बारिश कहते हैं। अगर ऊपर का टेंप्रेचर कम हो, तो यही पानी बर्फ या ओलों के रूप में भी गिरता है।
भारत में ज्यादातर बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून की वजह से होती है। गर्मियों में जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है, जबकि समुद्र ठंडा रहता है। इस टेंप्रेचर के डिफ्रेंस से हवा का दबाव चेंज होता है और समुद्र से नमी वाली हवाएं भारत की ओर आती हैं। जब ये हवाएं पहाड़ों या ठंडी हवा से टकराती हैं, तो इनमें मौजूद जलवाष्प एक साथ इकट्ठा बारिश के रूप में गिरती है। यही वजह है जून से सितंबर के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होती है।
साइंस के मुताबिक, क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न चेंज हो रहा है। कहीं बहुत ज्यादा बारिश हो रही है, कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है। बढ़ते तापमान के कारण क्लाइमेट में अधिक नमी जमा हो सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश होती है।
बारिश सिर्फ मौसम का पार्ट नहीं है, बल्कि जीवन का आधार भी है। इससे पीने का पानी मिलता है, खेती को पानी मिलता है, नदियां और झीलें भरती हैं, भूजल स्तर रिचार्ज होता है, जंगल और वन्यजीवों को जीवन मिलता है, इलेक्ट्रिक सप्लाई में हेल्प मिलती है।
कॉन्टेन्ट सोर्सः India Meteorological Department, World Meteorological Organization, National Aeronautics and Space Administration, National Oceanic and Atmospheric Administration, United States Geological Survey