दाहिनी कलाई पर ही क्यों बांधी जाती है राखी? इसके पीछे छिपा है रक्षा और संकल्प का बड़ा अर्थ

Published : Aug 18, 2026, 11:18 AM IST
Raksha Bandhan 2026

सार

Raksha Bandhan Significance: श्रावण पूर्णिमा पर हर साल रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार रक्षा बंधन ये पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ये पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।

Raksha Bandhan Rituals: रक्षा बंधन के दौरान भाई की कलाई पर बंधी रंग-बिरंगी राखी की तस्वीर सामने आती है। बहन भाई को तिलक लगाती है, आरती उतारती है और फिर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। लेकिन क्या आपने सोचा है राखी हाथ के किसी दूसरे हिस्से पर नहीं, बल्कि कलाई पर ही क्यों बांधी जाती है? दाहिनी कलाई को इतना महत्व क्यों दिया गया है? दरअसल, राखी सिर्फ भाई-बहन के प्यार की निशानी नहीं मानी जाती। यह रक्षा, शुभ संकल्प और जिम्मेदारी का प्रतीक है। पूजा-पाठ में भी कलाई पर मौली या रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है।

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कलाई को ही रक्षा सूत्र के लिए क्यों चुना गया?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में कलाई को रक्षा सूत्र बांधने के लिए महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। पूजा, यज्ञ या किसी शुभ काम के बाद भी इंसान की कलाई पर मौली बांधी जाती है। इसका मकसद सिर्फ धागा बांधना नहीं, बल्कि एक शुभ संकल्प को याद रखना माना जाता है। रक्षा बंधन में भी इसी विचार को आगे बढ़ाया गया है। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह उसके सुख, लंबी उम्र और मंगल की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। इस तरह कलाई पर बंधा धागा दोनों के बीच एक भावनात्मक और वचन-संकल्प का प्रतीक बन जाता है।

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दाहिनी कलाई को क्यों माना जाता है शुभ?

हिंदू मान्यता में दाहिने हाथ को शुभ कर्म और संकल्प से जोड़ा जाता है। पूजा, हवन, दान और दूसरे धार्मिक कार्यों में दाहिने हाथ के इस्तेमाल को खास महत्व दिया जाता है। इसी सोच की वजह से पुरुषों के दाहिने हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई।

राखी सिर्फ सजावटी धागा नहीं, बल्कि...

आज बाजार में रंग-बिरंगी राखियां मिलती हैं। इनमें मोती, रुद्राक्ष, चंदन, कार्टून कैरेक्टर और कई तरह की सजावट होती है। लेकिन धार्मिक नजरिए से राखी का मूल भाव रक्षा सूत्र का है। 'रक्षा सूत्र' का मतलब ही ऐसा सूत्र है जो सुरक्षा और शुभ संकल्प का प्रतीक हो। पूजा में बांधी जाने वाली मौली को भी रक्षा सूत्र कहा जाता है। इसलिए राखी की कीमत या उसका डिजाइन महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। असली महत्व उस भावना का है जिसके साथ इसे बांधा जाता है।

राखी बांधते समय मंत्र का भी महत्व

राखी बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है-
“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
इस मंत्र में राजा बलि का जिक्र है। इसका अर्थ है- 'जिस रक्षा सूत्र से राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा ! तुम अपने संकल्प से कभी विचलित न हो, स्थिर रहो, स्थिर रहो।'

पौराणिक परंपराओं में भी मिलता है रक्षा सूत्र का जिक्र

रक्षा सूत्र से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इंद्राणी द्वारा इंद्र को रक्षा सूत्र बांधने का जिक्र है। वहीं राजा बलि और लक्ष्मी से जुड़ी कथा भी रक्षा बंधन के साथ जोड़ी जाती है।

कलाई पर बंधी राखी का असली संदेश क्या है?

रक्षा बंधन में कलाई इसलिए खास है क्योंकि यहां धागा एक वचन का प्रतीक बन जाता है। बहन की ओर से भाई के लिए शुभकामना और भाई की ओर से बहन के प्रति जिम्मेदारी-दोनों भाव एक साथ जुड़ते हैं। यही वजह है- राखी का महत्व सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं माना जाता। कलाई पर बंधा छोटा-सा धागा भाई-बहन को उनके रिश्ते, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

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