
हेल्थ डेस्क. 29 साल से ब्राजील की खूबसूरत महिला लेटिसिया रोमास (Leticia Ramos) खुद को सर्वाइव करने के लिए कॉनस्टार्च पर निर्भर हैं। वो एक ऐसी रेयर बीमारी से पीड़ित हैं जिसमें लीवर बढ़ने लगाता है और मसल्स कमजोर होने लगते हैं। इस बीमारी का नाम है ग्लाइकोजनोसिस (glycogenosis) या ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज (glycogen storage disease)। यह बीमारी दुनिया भर में 25,000 लोगों में से लगभग 1 को प्रभावित करता है।
क्वीन ऑफ कॉर्नस्टार्च ने बताया कि यह रेयर मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है जो शरीर के ग्लाइकोजन को मेटाबॉलाइज करता है जो शरीर का मेन एनर्जी सोर्स है। लीवर में खतरनाक ग्लाइकोजन के लेबल को जमा होने से रोकने के लिए उसे हर तीन घंटे पर पानी में घुला हुआ कॉर्नस्टार्च पीना पड़ता है। वो 29 साल से ऐसा कर रही हैं। हर महीने वो 44 पाउंड कॉनस्टार्च भी जाती है।
वो कोमा में जा सकती हैं
अगर वो कॉनस्टार्च नहीं लेती है तो वो उसके लिए हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वो कोमा में जा सकती हैं। वो जब 2 साल की थी तब उसके माता-पिता को इस बीमारी के बारे में पता चला था। रोमास के पेट में सूजन,हाइपोग्लाइसीमिया यहां तक की उसे दौरे भी पड़ने लगे थे, जिसे देखकर माता-पिता परेशान हो गए थे।
कॉनस्टार्च के अलावा हर सुबह लेती हैं दवाइयां
उसकी मां बताती हैं कि बायोप्सी से पता चला कि रोमास टाइप 9 सी ग्लाइकोजनोसिस से पीड़ित थी, जो चरम पर था जिसकी वजह से स्थिति और खराब हो गई। मुझे याद नहीं कि उसे कितनी बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसने कुछ वक्त तक चलना बंद कर दिया था। उसे मस्कुलर मायोपैथी हो गई थी।सामान्य ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखने के लिए, रामोस को कॉर्नस्टार्च खाने के साथ-साथ सुबह उठकर दवाई लेनी होती थी। इसके अलावा सुगर फ्री डाइट लेना होता था।
रोमास बताती हैं कि कॉनस्टार्च पीने के अलावा वो एक दिन में 13 दवाइयां लेती हैं। डाइट का खास ख्याल रखती हूं। बाहर का मैं कुछ भी नहीं खाती-पीती हूं। वो बताती हैं कि शुरुआत में मुझे कॉनस्टार्च पीने में शर्म आती थी। मैं छुपकर इसे पिया करती थी। लेकिन जब आप एक बार अपनी सच्चाई को मान लेते हैं तो फिर चीजें आसान हो जाती हैं। वो सोशल मीडिया पर खुद से जुड़ी कहानियां शेयर करती हैं।
इंस्टाग्राम पर उनके 12000 फॉलोअर्स हैं। लोग उनकी हिम्मत की तारीफ करते हैं।
क्या है ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज (GSD)
ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज एक मेटाबॉलिक डिसोर्डर है, जिसकी वजह से हमारे शरीर में एंजाइम की कभी होने लगती है। इस वजह से ग्लाइकोजन संश्लेषण, ग्लाइकोजन टूटने या फिर ग्लाइकोलाइसिस (ग्लूकोज टूटने) को प्रभावित होने लगते हैं। यह बीमारी सामान्य तौर पर मांसपेशियों और लीवर की कोशिकाओं में होता है। जीएसडी को कई भागों में विभाजिक किया गया है, लेकिन इसके सबसे आम प्रकार I, III और IV हैं। इन सभी प्रकारों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
इसके लक्षण-
ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज के लक्षण प्रकार के साथ-साथ अलग-अलग होते हैं। इसके लक्षण शिशुओं में पहले दिखाई देते हैं।
GSD के लक्षण-
शारीरिक विकास में कमी।
गर्म मौसम में सहजता महसूस होना।
ब्लड शुगर में कमी
पेट में सूजन
लीवर का बढ़ना
मसल्स का कमजोर होना।
पेट में सूजन
मसल्स में दर्द और ऐंठन
ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज का इलाज
ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज के इलाज में डॉक्टर मरीज के ब्लड में ग्लूकोज का स्तर सही करने की कोशिश करते हैं। इसमें मरीज को कॉर्नस्टार्च और पोषण की नियमित खुराक लेने को कहते हैं। कॉनस्टार्च में एक ऐसा कार्बोहाइड्रेट होता है जिसे पचाने में काफी मुश्किल होता है। जिसकी वजह से
ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बनाए रखता है। इसके अलावा प्रगतिशील ग्रलाइकोजन डिजीज टाइप IV के बाद लीवर इम्प्लांट की सलाह देते हैं।
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