इस स्प्रे की वजह से नाक में ही ब्लॉक होगा कोरोना, नहीं बढ़ेगा इन्फेक्शन, रिसर्च पर क्लिनिकल ट्रायल

Published : May 03, 2020, 01:14 PM IST
इस स्प्रे की वजह से नाक में ही ब्लॉक होगा कोरोना, नहीं बढ़ेगा इन्फेक्शन, रिसर्च पर क्लिनिकल ट्रायल

सार

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। दुनिया भर में इससे 34 लाख, 84 हजार, 176 हो गई है। इससे अब तक 2 लाख 44 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, दुनिया भर के हेल्थ साइंटिस्ट कोरोना की दवा और वैक्सीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। दुनिया भर में इससे 34 लाख, 84 हजार, 176 हो गई है। इससे अब तक 2 लाख 44 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, दुनिया भर के हेल्थ साइंटिस्ट कोरोना की दवा और वैक्सीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। हाल ही में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कहा है कि कोरोना की रोकथाम के लिए एंटीवायरल नेजल स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वायरस फेफड़ों तक नहीं जा सकेगा। 

कहां हुई यह रिसर्च
यह रिसर्च स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज और फार्मा कंपनी न्यूमेजेन ने मिल कर की है। कोरोना का संक्रमण रोकने को लेकर तीन तरह की रिसर्च की गई। इससे पता चला कि एंटीवायरल नेजल स्प्रे में मौजूद mCBMs ड्रग कोरोना को नाक की कोशिकाओं में जाने से रोक देता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इस ड्रग का इस्तेमाल किया जाए तो कोरोना के संक्रमण को ब्लॉक किया जा सकता है।

नाक के रिसेप्टर्स पर रोकता है वायरस को
रिसर्च टीम के हेड प्रोफेसर गैरे टेलर का कहना है कि एंटीवायरल ड्रग आम तौर पर वायरस के कुछ हिस्सों को प्रभावित करता है, लेकिन न्यूमिफिल और मल्टीवैलेंट कार्बोहाइड्रेट बाइंडिग मॉलिक्यूल्स (mCBMs) नाक के रिसेप्टर्स पर ही वायरस को रोक देता है। यह वायरस को अंदर जाने नहीं देता। न्यूमिफिल ड्रग का इस्तेमाल आम तौर पर सांस से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। 

क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी
mCBMs ड्रग को बनाने वाली फार्मा कंपनी न्यूमेजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डगलस थॉम्पसन ने कहा है कि कोरोना के इलाज के लिए इस दवा को लेकर जो रिसर्च किए गए, उसके परिणाम अच्छे रहे हैं। इस दवा को काफी कारगर पाया गया है। अब कंपनी इंग्लैंड की हेल्थ एजेंसी और ग्लासगो यूनिवर्सिटी के साथ मिल कर इस पर काम कर रही है। थॉम्पसन ने कहा कि जल्दी ही इसका क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा और अंतिम रूप से सही नतीजे आने के बाद इसका प्रोडक्शन कर बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। 

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