सुष्मिता सेन की 8 महीने की भतीजी इस बीमारी से है पीड़ित, मां चारू असोपा ने दी जानकारी, जानें लक्षण और इलाज

Published : Jul 28, 2022, 05:45 PM ISTUpdated : Jul 28, 2022, 06:41 PM IST
सुष्मिता सेन की 8 महीने की भतीजी इस बीमारी से है पीड़ित, मां चारू असोपा ने दी जानकारी, जानें लक्षण और इलाज

सार

सुष्मिता सेन के भाई राजीव सेन और भाभी चारू असोपा के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनके बीच तलाक की बात चल रही है। इस बीच उनके बच्चे की बीमारी खबरों में आ गई है। सुष्मिता सेन की 8 महीने की भतीजी जियाना गंभीर बीमारी से जूझ रही है।

हेल्थ डेस्क. टीवी  एक्ट्रेस चारु असोपा (charu asopa) इन दिनों अपनी बेटी जियाना के साथ अकेली रह रही हैं। राजीव के साथ उनके अलगाव की खबर सुर्खियों में हैं। चारु असोपा इस बीच अपनी बेटी की बीमारी के बारे में बताया। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर बताया कि उनकी बेटी जियाना को हैंड फुट ऐंड माउथ डिसीज (HFMD)हो गई है। जिसकी वजह से वो खा पी नहीं पा रही है। इतना ही नहीं वो बहुत ही रोती है। मुश्किल से सो पाती है। एक मां होने के नाते चारु खुद को मजबूत की है। लेकिन इस वीडियो में उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वो बेटी की बीमारी के बाद टूट गई थी। लेकिन फिर से खुद को समेटा और उसके साथ हर पल मौजूद रहती हूं।आइए जानते हैं क‍ि हैंड फुट ऐंड माउथ डिसीज क्‍या होती है और इससे बच्चे को कैसे बचाएं।

चारु ने बताया कि इस बीमारी में हाथ पर, पैर पर और मुंह के अंदर दाने निकल आते हैं। जिसकी वजह से बच्चा कुछ खा पी नहीं सकता है। बस रोता रहता है। जियान के चेहरे, हाथ और पैर में दाने निकल आए हैं। उसे दवाई दी जा रही है। 

मानसून में यह बीमारी फैलती है

मानसून के मौसम में गर्मी के साथ-साथ नमी बढ़ जाती है। जिसकी वजह से  एंटिरोवायरस व कॉक्ससैकि वायरस सक्रिय हो जाते हैं। ये हैंड फुट ऐंड माउथ डिसीज को फैलाते हैं। यह वायरस ग्रुप में अटैक करता है। जिसकी वजह से एक साथ कई बच्चे इसके शिकार बन जाते हैं। इस वायरस की वजह से चेहरे पर, हाथों में, पैरों में यहां तक की टॉन्सिल के आसपास और पाचन तंत्रिका में दाने निकल आते हैं।

बीमारी के लक्षण

इस बीमारी में बुखार आता है। जो दो से तीन दिन तक रहता है। इसके अलावा शरीर पर दाने निकल आते हैं, मुंह के अंदर छाले पड़ जाते हैं। यह 8 से 10 दिन तक रहता है। इसके अलावा बच्चों को भूख नहीं लगता है वो चिड़चिड़ा हो जाते हैं।

इलाज और बचाव

मानसून के मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखना होता है। बार-बार हाथ धोना चाहिए। 
बच्चों को मवेशियों के संपर्क से दूर रखना चाहिए।
बच्चों के अंग को साफ करते रहें।
पैरासिटामोल बुखार दूर करने के लिए बच्चे को दें।
छालों के लिए कैलेमाइन लोशन का प्रयोग करें। 
दूसरे बच्चे को पीड़ित बच्चे के संपर्क में नहीं आने दें।
बच्चे को डॉक्टर से दिखाकर दवाई लेना चाहिए। 

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