
हेल्थ डेस्क। आंखों में जब कम दिखने लगे और ज्यादा उम्र के लोगों की आंखों की रोशनी कम होने लगे तो अक्सर लोग उसे मोतियाबिंद मान लेते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आंखों में कई तरह की बीमारियां होती है। ऐसे ही एक बुजुर्ग मरीज की कहानी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता रामनानी ने बताई जिन्होंने कम दिखने के बाद मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी करा लिया था लेकिन उन्हें ये बीमारी थी ही नहीं। उन्हें ग्लॉकोमा काला मोतिया था। ग्लोकॉमा अंधत्व का दूसरा बड़ा कारण जिसकी रोकधाम की सकती है और ये बीमारी अगर परिवार में किसी को हो गई तो इसके बाकी परिवार के लोगों में होने की संभावना 7-10 गुना बढ़ जाती है।
ग्लॉकोमा (काला मोतिया) क्या है ?
ये एक आंखों की बीमारी है जिसमें आंखों का दबाव बढ़ता है और देखने वाली नस कमजोर होती है। जिसकी वजह से धीरे-धीरे दिखना कम हो जाता है। ज्यादातर मामलों में, ग्लोकोमा आंख के अंदर उच्च से सामान्य दबाव से जुड़ा होता है एक स्थिति में जिसे ओकुलर हाइपरटेंशन कहा जाता है ।
इस बीमारी के लक्षण क्या -क्या ?
कालापानी को साइलेंट किलर कहा जाता है। इस बीमारी के लक्षण लगातार सिर दुखना, आंखे दुखना, आंखों में काला धब्बे दिखना और इन्द्रधनुषी गोले दिखना।
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ग्लॉकोमा का खतरा किन्हें हो सकता है
बड़ा हुआ आंखों का दबाव
बढ़ती उम्र
ब्लडप्रेशर
डायबिटीज के पेशेंट
ग्लॉकोमा का इलाज
ग्लॉकोमा का इलाज द्वारा आंखों का दबाव कम किया जा सकता है। समय पर इसका इलाज करवा कर आंखों की रोशनी को खराब होने से बचाया जा सकत है। इसका इलाज तीन तरह से होता है। पहला लेजर दूसरा दवाइयां लेने और तीसरा ऑपरेशन से इसे ठीक किया जा सकत है। इसके इलाज में 15-20 हजार का खर्चा आता है। भारत में हर आई क्लिनिक में इसका ट्रीटमेंट हो सकता है।
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