
हेल्थ डेस्क। आज पूरी दुनिया में लोगों के स्वास्थ्य के लिए मोटापा एक बड़ी समस्या बन गया है। यहां तक कि कम उम्र के लोग भी इस समस्या के शिकार हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बदलती जीवनशैली है। अब लोग मेहनत-मशक्कत नहीं करते और उनका ज्यादातर समय एक जगह बैठ कर कम्प्यूटर पर काम करने में बीतता है। इसके अलावा खानपान की बदलती आदतों के चलते भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम उम्र के लोगों में भी बढ़ रहा है, जिससे दिल से संबंधित बीमारियां होने का खतरा उनमें बढ़ा है। हाल ही में पेरिस में इसे लेकर एक रिसर्च स्टडी हुई है। इस स्टडी से यह पता चला है कि मोटापा वैसे तो सबके लिए खराब है, लेकिन पुरुषों पर इसका असर महिलाओं की तुलना में ज्यादा ही बुरा होता है। स्टडी में पाया गया कि मोटापे की वजह से पुरुषों में महिलाओं की तुलना में हार्ट अटैक का खतरा 29 प्रतिशत ज्यादा होता है। वहीं, यह भी पता चला कि अगर बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम किया जाए तो पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा 6 प्रतिशत तक कम हो पाता है।
4 लाख मरीजों पर की गई स्टडी
यह रिसर्च स्टडी 4 लाख मरीजों पर की गई, जिनकी उम्र औसतन 40 साल से ज्यादा थी। स्टडी में बढ़ते कोलेस्ट्रॉल लेवल और दिल की बीमारियों से इसके संबंधों को समझने का प्रयास किया गया है। इससे पता चला है कि कम उम्र के पुरुषों में भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर इस खतरे को दूर किया जाना संभव है। यह स्टडी मशहूर जर्नल 'द लैंसेट' (The Lancet) में पब्लिश हुई है।
स्मोकिंग से और भी बढ़ता है खतरा
स्टडी में पाया गया कि जो लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं और समोकिंग भी करते हैं, उनमें स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा ही होता है। 45 साल से कम उम्र के लोगों में यह खतरा जहां 29 प्रतिशत पाया गया, वहीं औरतों में यह महज 16 प्रतिशत ही है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करना जरूरी
रिसर्च स्टडी में कहा गया है कि इस खतरे को कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम कर के दूर किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद पुरुषों में 6 प्रतिशत और महिलाओं में 4 प्रतिशत तक ही हार्ट अटैक की समस्या पर काबू पाए जाने की बात कही गई।
जल्दी इलाज से दूर हो सकती है समस्या
यूनिवर्सिटी ऑफ अयोवा के प्रोफेसर जेनिफर रॉबिन्सन ने इस स्टडी को लेकर कहा कि अगर जल्दी इलाज किया गया तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। इसमें सबसे जरूरी है बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करना। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर पॉल लीसॉन का कहना है कि इस समस्या में लंबे समय तक इलाज और मेडिसिन लेने की जरूरत होती है। उनका कहना था कि सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कैसे और कितनी जल्दी कम किया जाता है। उनका कहना था कि लोग लंबे समय तक इलाज नहीं करवा पाते और न ही दवाई लेते हैं, इसलिए कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ते चले जाने से हार्ट अटैक होने की संभावना बनी रहती है।
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