
हेल्थ डेस्क। नए साल के साथ ही नए दशक की शुरुआत पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक रिपोर्ट जारी कर उन बीमारियों और महामारियों के बारे में बताया है, जिनके खतरे का सामना पूरी दुनिया के लोगों को करना होगा। इसे एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट माना जा रहा है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि चिकित्सा के क्षेत्र में नई खोजों और नए प्रयोगों के बावजूद इस दशक में संक्रामक रोगों के खतरे के साथ महामारियों की आशंका बनी रह सकती है। यह अलग बात है कि पहले की तुलना में चिकित्सा सुविधाओं का प्रसार बढ़ा है, लेकिन दुनिया की गरीब आबादी की आज भी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच नहीं बढ़ी है। जानते हैं 13 जनवरी को जारी इस रिपोर्ट की मुख्य बातों के बारे में।
1. पर्यावरण में आ रहे बदलाव का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। प्रदूषण की समस्या दुनिया के पैमाने पर बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से कई तरह के वायरस वातावरण में फैल रहे हैं। पर्यावरण की गड़बड़ी के कारण दिल की बीमारियां, फेफड़ों का कैंसर और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बता दें कि पिछले साल 50 देशों के 80 से ज्यादा शहरों में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एयर क्वालिटी गाइड लाइन्स को स्वीकार किया है।
2. बढ़ सकते हैं संक्रामक रोग
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दशक में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यह अलग बात है कि कई बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन आ चुके हैं, लेकिन फिर भी तीसरी दुनिया के देशों में एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस, मलेरिया और सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) के मामले बढ़ेंगे। एक अनुमान व्यक्त किया गया है कि इन बीमारियों से करीब 40 लाख लोगों की मौत हो सकती है। बता दें कि पिछले साल इन बीमारियों से दुनियाभर में 140,000 लोगों की मौत हुई। यह दावा किया गया था कि पोलियो को खत्म कर दिया गया है, पर इस बीमारी के 156 मामले पिछले साल सामने आए थे।
3. महामारियों का कहर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए दशक में महामारियां भी फैल सकती हैं। महामारियों से बचाव का कोई सही उपाय सामने नहीं आ सका है। हवा के माध्यम से फैलने वाले वायरस एन्फ्लुएंजा का खतरा सबसे ज्यादा बताया गया है। इसके अलावा डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस, चिकनगुनिया और पीला बुखार (यलो फीवर) भी महामारी का रूप ले सकता है।
4. स्वास्थ्य संबंधी दूसरी चुनौतियां
इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य संबंधी कुछ दूसरी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें कम उम्र में होने वाली मौतें, दवाओं के बेअसर होने की समस्या और पानी व दूसरी सुविधाओं की कमी की बात कही गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, हर साल 10 से 19 साल के उम्र के 10 लाख से भी ज्यादा बच्चे सड़क दुर्घटना, एचआईवी और सुसाइड से मौत का शिकार हो जाते हैं। इसके साथ ही शराब और तंबाकू के सेवन में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कई तरह की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक 1 करोड़ 80 लाख नए हेल्थ वर्कर्स की जरूरत पड़ेगी, जो दुनिया के सभी देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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