
हेल्थ डेस्क। 1 दिसंबर को पूरी दुनिया में एचआईवी संक्रमण के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत जेम्स डब्ल्यू बून और थॉमस नेटर ने साल 1988 में की थी। ये दोनों विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में एड्स पर चलाए जा रहे ग्लोबल कार्यक्रम के अधिकारी के रूप में जेनेवा में नियुक्त थे। तब से यह दिवस हर साल मनाया जाता है। इस साल वर्ल्ड एड्स डे 2019 की थीम है 'कम्युनिटीज मेक द डिफरेंस', जबकि साल 2018 में थीम थी 'अपनी स्थिति जानें।'
बता दें कि एड्स का खतरा दुनिया में अभी कमा नहीं है। अभी भी यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में रोज 980 बच्चे एचआईवी वायरस के शिकार हो जाते हैं, जिनमें करीब 320 बच्चों की मौत हो जाती है। यूनिसेफ की ही एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 37.9 मिलियन लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में एचआईवी से संक्रमित लोगों की कुल संख्या करीब 2.1 मिलियन है। शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था।
किसी भी उम्र के लोग हो सकते हैं शिकार
पहले यह माना जाता था कि यह संक्रमण ज्यादातर युवाओं को ही होता है, लेकिन बाद में पता चला कि किसी भी उम्र के लोग एचआईवी संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस संक्रमण के बारे में पता चलने के दशकों बीत जाने के बाद इसका कोई प्रभावी टीका नहीं खोजा जा सका है, न ही इसके इलाज का कोई प्रभावी तरीका तलाश किया जा सका। साल 1996 में HIV/AID को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व स्तर स्तर पर पहल करते हुए इसकी रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान बड़े पैमाने पर शुरू किया और साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत इसकी रोकथाम के लिए काफी काम किया।
किन कारणों से होता है एड्स
एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता लगभग खत्म हो जाती है। बताया जाता है कि असुरक्षित यौन संबंधों के चलते यह बीमारी लोगों को होती है। संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से एचआईवी का वायरस उसमें चला आता है। लेकिन संक्रमण के मूल कारणों का कोई पता नहीं चल सका है। एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने, इस्तेमाल की गई नीडल का दोबारा यूज करने और संक्रमित ब्लेड के इस्तेमाल से भी एड्स की बीमारी होती है। लेकिन एचआईवी संक्रमण क्यों होता है, इसका पता नहीं चल सका है।
एचआईवी संक्रमण के लक्षण
एचआईवी संक्रमण होने पर बुखार के साथ कमजोरी, ठंड लगाना, वजन का लगातार कम होते जाना, थकान होना, उल्टी की समस्या होना, खांसी होना, सांस लेने में दिक्कत होने के साथ स्किन से जुड़ी बीमारियां होने लगती हैं। यही नहीं, एक साथ कई तरह की बीमारियों के लक्षण उभरते हैं, जिसका इलाज कर पाना डॉक्टरों के लिए कठिन हो जाता है। अगर एचआईवी के संक्रमण की वजह से किसी बीमारी के लक्षण उभरते हैं तो कोई दवा भी असर नहीं करती। जो व्यक्ति एड्स का शिकार हो गया, उसकी मौत तय है। यह अलग बात है कि अब मल्टी ड्रग थेरेपी से रोगी की जान कुछ वर्षों तक बचाई जा सकती है।
गर्भ में शिुशु को भी हो सकता है संक्रमण
अगर मां एचआईवी से संक्रमित है तो गर्भ में पल रहे उसके बच्चे को भी एड्स का संक्रमण हो जाता है। इसलिए गर्भावस्था में जांच जरूरी है। बहुत से लोग एड्स संबंधी जांच कराने से बचना चाहते हैं। लोग एचआईवी की जांच इसलिए भी नहीं करना चाहते, क्योंकि उनमें यह धारणा फैली है कि यौन संबंधों से यह बीमारी होती है। लेकिन ऐसी बात नहीं है। एड्स की बीमारी के कई कारण हैं, जिनके बारे में लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
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