झारखंड के इस गांव का क्या है रहस्य: जहां हैं 365 शिवलिंग, मंदिर में रहता है रहस्यमयी नाग

Published : Jul 26, 2022, 03:42 PM IST
झारखंड के इस गांव का क्या है रहस्य: जहां हैं 365 शिवलिंग, मंदिर में रहता है रहस्यमयी नाग

सार

यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान जी की बाल अवस्था में माता अंजनी के गोद में बैठी प्रतिमा को देखा जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म इसी गांव में हुआ था। यहां कई तालाब भी हैं। 

गुमला. झारखंड में एक ऐसा गांव है जहां हर जगह भगवान शिव बिराजमान है। बताया जाता है कि राज्य के गुमला जिले में स्थित इस गांव में करीब 360 शिवलिंग हैं। गांव का नाम है आंजन। मान्यता है कि हनुमान जी की माता अंजनी हर दिन एक तालाब में स्नान कर शिवलिंग में जलाभिषेक करती थी। माता अंजनी ने 365 तालाबों में स्नान कर शिवलिंग पर जल अभिषेक किया था। इसलिए गुमला से 21 किमी दूर आंजन के जंगल व पहाड़ों में 365 शिवलिंग व उतने ही तालाब होने के प्रमाण हैं। वैसे आंजन गांव रामभक्त हनुमान के लिए जाना जाता है। कहते हैं कि आंजन गांव के कण-कण में हनुमान बसे हैं। इस गांव के पग-पग पर भगवान शिव का दर्शन होता है। यहां 360 शिवलिंग हैं, जो जगह-जगह देखे जा सकते हैं। शिवलिंग कितने पुराने हैं, कोई बताने वाला नहीं है, पर देखने से यह प्राचीनकाल के लगते हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि माता अंजना परम शिवभक्त थीं। इसी कारण इस गांव में इतने शिवलिंग मिलते हैं। 

माता अंजना हर दिन करती थीं भगवान शिव की पूजा
जानकारी के अनुसार इस गांव में 360 तालाब और इतने ही महुआ के पेड़ थे। माता हर दिन एक तालाब में स्नान-ध्यान कर भगवान शिव की पूजा करती थीं। समय के साथ तालाब और पेड़ तो नहीं रहे, लेकिन यहां थोड़ी- थोड़ी दूरी पर आज भी शिवलिंग का दर्शन हो सकता है। सावन में इस देवभूमि पर भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा और प. बंगाल से भक्त यहां मुरादें लेकर आते हैं।

आंजन गांव में ही जन्में थे हनुमान
गुमला को देवभूमि माना जाता है। यहां पहला ऐसा मंदिर है जहां बाल अवस्था में माता की गोद में हनुमान जी विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं। गुमला जिला मुख्यालय से 20 किमी दूरी पर अवस्थित पवित्र आंजन पर्वतमाला पर्वत है। इसी पहाड़ की चोटी पर गुफा में माता अंजनी ने हनुमानजी को जन्म दिया था। इसे आंजनधाम कहा जाता है। माता अंजनी हर दिन विशेष विधि से भगवान शिव की पूजा करती थीं। शिव के वरदान से ही हनुमान जी का अवतरण हुआ। माता अंजनी के नाम से ही गांव का नाम आंजन और हनुमान जी की जन्मस्थली आंजनधाम के नाम से जाना गया। आंजन गांव में कदम-कदम पर भगवान शिव का दर्शन होगा। 

अंजनी मंदिर के नीचे सर्प गुफा में होते हैं नाग दर्शन
आंजनधाम प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान जी की बाल अवस्था में माता अंजनी के गोद में बैठी प्रतिमा को देखा जा सकता है। मंदिर में राधा-कृष्ण, राम-लक्ष्मण व सीता और शिव की प्रतिमा हैं। रामनवमी, हनुमान जयंती सहित सावन के महीने में विशेष पूजा अर्चना होती है। अंजनी मंदिर के नीचे एक सर्प गुफा है। वहां श्रद्धालुओं को नाग के दर्शन होते हैं।

पहाड़ों, खेतों और जंगलों में मिलते हैं शिवलिंग
आंजनधाम में कई शिवलिंग पहाड़ के ऊपर हैं तो कुछ शिवलिंग खेत व जंगल के बीच हैं। कुछ शिवलिंग को लोगों ने घेराबंदी कर घर बना लिया है। देखरेख के आभाव व वर्षो तक पूजा नहीं होने के कारण कई शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो गये हैं। भगवान हनुमान का जन्म होने के कारण यह क्षेत्र विश्व विख्यात है। आज भी यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। रामनवमी में कई दिनों तक यहां भक्त आते हैं। इस क्षेत्र के लोग आज भी अपने को भगवान हनुमान का वंशज मानते हैं और रामनवमी में बैगा पहान लंगोट बांधकर पूजा करते हैं।

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