झारखंड में सस्पेंस बरकरार: गवर्नर कब लेंगे फैसला, मंत्री बोले- MLA की खरीद-फरोख्त के लिए हो रही देरी

Published : Aug 29, 2022, 10:40 AM IST
झारखंड में सस्पेंस बरकरार: गवर्नर कब लेंगे फैसला, मंत्री बोले- MLA की खरीद-फरोख्त के लिए हो रही देरी

सार

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की विधायकी पर संशय बना हुआ है। महागठबंधन के विधायकों ने भाजपा पर हेमंत सरकार को बदनाम करने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। 

रांची. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में राज्यपाल के फैसले में देरी पर यूपीए के विधायक व मंत्री पहली बार मीडिया के सामने आए। 28 अगस्त की रात हेमंत सरकार के 11 विधायकों ने सीएम आवास में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज भवन पर सीधा हमला किया। प्रेस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री चंपई सोरेन, मंत्री बन्ना गुप्ता, विधायक लोबिन हेंब्रम, सरफराज अहमद, मथुरा महतो, सत्यानंद भोक्ता, स्टीफन मरांडी, दीपक पांडे सिंह, पूर्णिमा नीरज सिंह, अंबा प्रसाद अनूप सिंह आदि शामिल थे। 28 अगस्त को गेस्ट हाउस और सीएम आवास में दिन भर चली बैठक के बाद यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित हुआ। मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि क्या समय काट कर राजभवन विधायकों के खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देना  चाहता है। हमने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी राज्यपाल के पद की गरिमा को गिरते देखा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हम किसी अनुकंपा पर सरकार में नहीं आए हैं।

जनता में भ्रम
भाजपा पर हेमंत सरकार को बदनाम करने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। राज्य में विधायकों की तोड़फोड़ की कोशिश कहीं से उचित नहीं है। मंत्री व विधायकों ने कहा कि यहां आईडी छापेमारी करता है लेकिन 20-20 दिन बाद भी जब्त किए गए सामान की जानकारी नहीं देता है। झारखंड के लोग सीधे सरल हैं। यह बिरसा मुंडा बुध भगत से लेकर शिबू सोरेन की धरती है। यहां के लोगों को संघर्ष करना आता है।

महागठबंधन की सरकार को पूर्ण बहुमत: बन्ना गुप्ता
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्यपाल ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जल्द फैसला सुनाए। उनके फैसले पर 24 घंटे के भीतर हम भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना फैसला सुना देंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार को पूर्ण बहुमत है। 50 से अधिक विधायकों का समर्थन है। फिर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। भाजपा की सरकार यहां भी धारा 356 का इस्तेमाल कर हमें सत्ता से बेदखल कर दे। अगर ऐसा करने की कबूत नहीं है तो इस तरह का प्रलाप नहीं करें। झारखंड में सारा सिस्टम रुक गया है जिस तरीके से मामले को उलझाया जा रहा है। उससे राज्य सरकार की विश्वसनीयता के प्रति लोगों में अनावश्यक रूप से भ्रम पैदा हो रहा है। बन्ना गुप्ता ने कहा कि ऐसे मामले में आज तक किसी की सदस्यता रद्द नहीं हुई है फिर भी हेमंत सोरेन के साथ और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है। चुनाव आयोग के पत्र पर राज्यपाल ने अभी तक अपना मंतव्य नहीं दिया है ऐसी क्या कानूनी सलाह है जो भी नहीं ले पा रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के झारखंड प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे से मुलाकात की। स्टेट गेस्ट हाउस में दोनों के बीच काफी देर तक वार्ता हुई। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी मौजूद थे। यूपीए की रणनीति पर भी विचार विमर्श किया गया। करीब 55 मिनट के बाद सीएम स्टेट गेस्ट हाउस से निकल गए। यह पहला मौका है जब यह खुद कांग्रेस प्रभारी से मिलने गेस्ट हाउस पहुंचे। 

कभी भी आ सकता है फैसला
पिछले कुछ दिनों से झारखंड की राजनीति गरमाई हुई है। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में सीएम की विधायकी जा सकती है। चार दिनों से लोग राज्यपाल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार को राज्यपाल अपना फैसला सुना सकते हैं। जिसके बाद झारखंड की राजनीति में उथल-पुथल हो सकती है।

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