सावन में बढ़ जाती है इस फल की डिमांड, कीमत हैरान करने वाली, शाकाहारी लेकिन इसका नाम मांसाहारी जैसा

Published : Jul 29, 2022, 10:56 AM ISTUpdated : Jul 29, 2022, 02:15 PM IST
सावन में बढ़ जाती है इस फल की डिमांड, कीमत हैरान करने वाली, शाकाहारी लेकिन इसका नाम मांसाहारी जैसा

सार

झारखंड में इन दिनों खूब बिक रही है वेज मटन। इसके खाने के बाद लगता है जैसे आपने सच में मीट खाया हो। जानिए कहां और कब मिलता है वेज मटन, साथ ही क्या फायदे है इसे खाने के, और क्यो कहलाता है वेज मीट...

रांची: झारखंड में इन दिनो वेज मटन की बिक्री खूब हो रही है। नॉनवेज खाने वाले लोग  श्रावण  के माह में इस वेज मटन की खूब खरीदारी कर रहे हैं। यह वेट मटन 400 से 500 रुपए प्रति किलो बाजार में बिक रहा है। इस वेज मटन को रुगड़ा कहा जाता है। रुगड़ा को झारंखड में वेट मटन के रुप में ही जाना जाता है। इस स्वाद एकदम मटन जैसा होता है। रुगड़ा दिखने में छोटे आकार के आलू की तरह होता है। यह जमीन के भीतर पैदा होती है। रुगड़ा में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होती है। कैलोरी और वसा नाम मात्र की होती है। रुगड़ा को अंडरग्राउंड मशरूम, सुखड़ी, पुटो , पुटकल आदि  के नाम से भी जाना जाता है। यह बिल्कुल साकाहारी व्यंजन है। प्राकृतिक तौर पर इसकी उपज होती है। इसकी खेती नहीं की जाती है। कई लोग मानते हैं कि आकाशीय बिजली भी रुगड़ा उगाने में काफी मदद करता है। जंगल के आस-पास के ग्रामीणों का मानना है कि जितना बादल गरजेगा उतना ही ज्यादा रुगड़ा निकलेगा। 

बारिश के दिनो में साल जंगल में मिलता है रुगड़ा
रुगड़ा सिर्फ बारिश के मौसम में ही मिलता है। यह जमीन के भीतर पैदा होता है।  सिर्फ साल जंगलों में रुगड़ा मिलता है। बरसात के मौतम में साल के जंगलों में साल वृक्षों के नीचे पड़ जाने वाली दरारों में पानी पड़ते ही रुगड़ा पनपना शुरु हो जाता है। जंगल से चुनने के तीन से चार दिन में रुगड़ा खराब हो जाता है।  साल जंगलों से ग्रामीण रुगड़ा को चुनकर कारोबारियों को बेचते हैं। फिर सभी कारोबारी शहरों में लाकर इसकी बिक्री करते हैं। रुगड़ा का इंतजार लोगों को साल भर रहता है। नॉनवेज नहीं खाने वाले लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। जबकि नॉनवेज खाने वाले लोग स्रावण माह में रुगड़ा का बाजार में आने का विसेष रुप से इंजजार करते हैं।


दवा के रुप में भी काम करता है रुगड़ा
रुगड़ा दवा के रुप में भी काम करता है। यह कई रोगों की दवा है। रुगड़ा मनुष्यों के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसमें प्रोटीन के अलावा विटामिन सी, विटामिन बी कांप्लेक्स, राईबोलेनिन, थाइमिन, विटामीन बी 12, विटामीन डी पाया जाता है। कैंसर जैसे घातक रोगों से बचाने और लडऩे में भी रूगड़ा काफी सहायक सिद्ध हुआ है।रुगड़ा का वैज्ञानिक नाम लाइपन पर्डन है। यह मशरुम का ही एक प्रजाति है। लेकिन यह जमीन के भीतर होता है। इसके करीब 12 प्रजाति हैं।सफेद रंग के रुगड़े में सर्वाधिक पौष्टिक होता है। झारखंड के अलावा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में भी रुगड़ा पाया जाता है। लेकिन झारखंड में इसे लोग वेट मटन के नाम से भी जानते हैं।

ग्रामीणों को रोजगार देता है रुगड़ा
बारिश के मौसम में रुगड़ा साल जंगलों के आस-पास रहने वाले ग्रमीणों के लिए रोजगार का साधन भी है। जंगलों के आस-पास रहने वाले ग्रामीण झुंड बनाकर साल जंगल में जाते हैं और रुगड़ा जमीन के नीचे से चुनते हैं। सुबह से ही ग्रामीण रुगड़ा की तलाश में झुड बनाकर साल जंगलों में प्रवेश करते हैं।  रुगड़ा बेच ग्रामीण अच्छी खासी आमदनी कर लेते हैं। रुगड़ा झारखंड के रांची, पूर्वीं सिहभूम, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, चतरा समेत अन्य जिलों के साल जंगलों में में बहुयात पाया जाता है।

यह भी पढ़े- जमशेदपुर में सनसनी: बच्चे को स्कूल छोड़कर चाय पीने लगा युवक, थोड़ी देर बाद परिजनों को मिली मौत की खबर

PREV

झारखंड की सरकार, खनन-उद्योग, आदिवासी क्षेत्रों की खबरें, रोजगार-विकास परियोजनाएं और सुरक्षा अपडेट्स पढ़ें। रांची, जमशेदपुर, धनबाद और ग्रामीण इलाकों की ताज़ा जानकारी के लिए Jharkhand News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — विश्वसनीय स्थानीय रिपोर्टिंग सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Recommended Stories

रांची में CA बेटे की मौत, जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष कर रही वकील मां और बेटी
Ranchi Weather Update: 26 जनवरी को रांची में कितनी पड़ेगी ठंड? जानिए आज के मौसम का पूरा हाल