जो डॉक्टर न बता सके वो एम्बुलेंस के ड्राइवर ने मरीज को छूते ही बता दिया, इसके बाद मुंह छुपाने लगे 'भगवान'

Published : Mar 16, 2020, 04:53 PM ISTUpdated : Mar 16, 2020, 06:30 PM IST
जो डॉक्टर न बता सके वो एम्बुलेंस के ड्राइवर ने मरीज को छूते ही बता दिया, इसके बाद मुंह छुपाने लगे 'भगवान'

सार

झारखंड के धनबाद में एक मरीज से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अपने पेशे को कलंकित कर दिया। जानिए पूरा मामला...  

धनबाद, झारखंड. यहां एक 62 वर्षीय मरीज की जिंदगी और मौत से जुड़ी चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। जिसे डॉक्टर जिंदा बता रहे थे, उसे एम्बुलेंस के ड्राइवर ने छूकर जैसे ही मरा बताया..परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर मरीज को जिंदा बताकर वेंटिलेटर पर रखे हुए थे। लेकिन जब उसे दूसरे हॉस्पिटल में ले जाने एम्बुलेंस बुलाई, तो ड्राइवर ने छूते ही बता दिया कि मरीज की तो मौत हो चुकी है। हंगामा बढ़ते देख हॉस्पिटल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को इलाज के बहाने लिए गए पैसे लौटे दिए। पुलिस की मौजूदगी में यह समझौता हुआ।


बिल वसूलने नाटक करते रहा हॉस्पिटल मैनेजमेंट
हरिनारायण सिंह कॉलोनी निवासी रवींद्र प्रसाद सिंह को एशियन जालान हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि बिल बढ़ाने के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट मरीज को वेंटिलेटर पर रखे रहा। इसका खुलासा तब हुआ, जब मरीज को दूसरे हॉस्पिटल में रेफर कराके ले जाया जा रहा था। इसी दौरान एम्बुलेंस के ड्राइवर ने मरीज को छूआ, तो उसने बताया कि उसकी तो मौत हो चुकी है। जब हंगामा बढ़ा, तो डॉक्टर ने मान लिया कि मरीज की मौत हो चुकी है। इसके बाद मरीज का इलाज करने वाले डॉ. कुणाल किशोर वहां से चले गए।

लौटा दिया इलाज का पूरा पैसा...
हॉस्पिटल में हंगामा बढ़ते देख सदर थाना पुलिस को सूचित किया गया। थाना प्रभारी संजीव तिवारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों को बैठाया गया। हॉस्पिटल प्रबंधन सारा बिल लौटाने को राजी हो गया। हॉस्पिटल ने 1.20 लाख रुपए का बिल बनाया था। उसमें से 75 हजार तत्काल रिफंड कर दिए। बाकी का पैसा जल्द लौटाने का आश्वासन दिया। मरीज के परिजनों को मुताबिक, इसमें दवाओं का खर्चा शामिल नहीं है। मृतक के बेटे राकेश कुमार सिंह ने बताया कि वे जब भी अपने पिता को दूसरे हॉस्पिटल में ले जाने की बात करते..डॉक्टर मना कर देते थे। राकेश कुमार सिंह ने बताया कि उनके पिता 6 मार्च को गिर पड़े थे। उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। इसके बाद उन्हें जालान हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर इलाज के नाम पर उनसे पैसे ऐंठते जा रहे थे।

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