
उज्जैन. इस तिथि को विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों व अन्य शुभ कार्यों के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है। इस बार वसंत पंचमी पर सिद्धि व सर्वार्थसिद्धि योग जैसे दो शुभ मुहूर्त का संयोग भी बन रहा है। इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।
ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य पं गणेश मिश्रा के अनुसार इस बार वसंत पंचमी इसलिए भी श्रेष्ठ है,क्योंकि सालों बाद ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति इस दिन को और खास बना रही है।
- इस बार तीन ग्रह खुद की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत ही शुभ मानी जाती है।
- पं मिश्रा के अनुसार वसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त वाले पर्वों की श्रेणी में शामिल है, इस दिन गुरुवार व उतराभाद्रपद नक्षत्र होने से सिद्धि योग बनेगा।
- इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। दोनों योग रहने से वसंत पंचमी की शुभता में और अधिक वृद्धि होगी।
वसंत पंचमी का महत्व
- धर्म ग्रंथों के अनुसार, वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए, क्योंकि इसी तिथि पर इनकी उत्पत्ति हुई थी।
- देवी सरस्वती, बुद्धि, विद्या और संगीत की देवी हैं। इसलिए इस दिन पाठ्य सामग्री जैसे पुस्तक, पेन और संगीत यंत्रों की भी पूजा करनी चाहिए।
- प्राचीन समय में इस दिन नव विद्यार्थियों को गुरुकुल में प्रवेश दिया जाता था, इस दौरान विद्यारंभ उत्सव भी मनाया जाता था।
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