
उज्जैन. माना जाता है कि पौष महीने में पितरों के लिए पिंडदान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और वे वैकुंठ की ओर प्रस्थान करते हैं। साथ ही विधि-विधान से की गई पूजा पाठ व स्मरण से उनके वंशजों को उनका आशीर्वाद मिलता है। इस बार अमावस्या तिथि के साथ सिद्धि, शुभ और सर्वार्थसिद्धि नाम के 3 शुभ योग भी बन रहे हैं। इससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। आगे जानिए इस तिथि से जुड़ी खास बातें…
शुभ मुहूर्त
पौष अमावस्या शुरू: 2 जनवरी सुबह 3.43 पर
पौष अमावस्या खत्म: 3 जनवरी सुबह 5.26 पर
घर पर ही करें पवित्र स्नान
वैसे तो अमावस्या तिथि पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है, लेकिन ऐसा संभव न हो तो घर में ही किसी तीर्थ का जल मिलाकर स्नान करें। अगर तीर्थ का जल न हो तो नीचे लिखे श्लोक को बोलकर स्नान करें। इससे भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।
तिथि का महत्व
अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान, पूजा, जाप और तप की विशेष परंपरा है। अमावस्या के दिन गंगा स्नान कर पूजा करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, साथ ही पितरों के निमित्त दान करने से पितर संतुष्ट होते हैं। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए शुभ माना गया है। अत: अमावस्या के दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों और सरोवर में स्नान कर तिल तर्पण भी करते हैं।
पितरों की प्रसन्नता के लिए करें ये काम
1. अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान के साथ ही भगवान कृष्ण की पूजा करें और गीता का पाठ करें।
2. सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों का तर्पण करें। तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
3. पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।
4. पीपल के वृक्ष में जल दें और दीपक लगाएं।
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