जिन लोगों की जन्म कुंडली में होते हैं ये अशुभ योग उन्हें बोलने और सुनने में होती है परेशानी

Published : Mar 03, 2022, 05:30 PM ISTUpdated : Mar 03, 2022, 06:11 PM IST
जिन लोगों की जन्म कुंडली में होते हैं ये अशुभ योग उन्हें बोलने और सुनने में होती है परेशानी

सार

कई बार देखने में आता है कि कुछ बच्चों को जन्म से ही बोलने और सुनने में दिक्कत होती है या वे जन्म से ही सुन या बोल नहीं पाते। इसका कारण शारीरिक अक्षमता हो सकती है। बोलने में तूतलाना या हकलाना भी इसी का प्रकार है।

उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र में इस बारे में काफी विस्तार पूर्वक बताया गया है। उसके अनुसार, कुंडली में जब कुछ खास योग बनते हैं तो इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों में इस प्रकार की समस्या उम्र भर बनी रहती है, जबकि कुछ लोग समय के साथ इस परेशानी से बाहर निकल आते हैं। आज हम आपको कुंडली के इन योगों के बारे में बता रहे हैं। इन मामलों में चिकित्सक के साथ-साथ योग्य ज्योतिषी से भी सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

कुंडली में बधिर योग (सुनने में परेशानी) 
1. जिस लोगों की कुंडली में शनि से चतुर्थ स्थान में बुध हो और षष्ठेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो।
2. पूर्ण चंद्र और शुक्र ये दोनों शत्रुग्रह से युक्त हों।
3. रात्रि का जन्म हो, लग्न से छठे स्थान में बुध और दसवें स्थान में शुक्र हो।
4. बारहवें भाव में बुध, शुक्र दोनों हों।
5. 3, 5, 9, 11 भावों में पापग्रह हों और शुभग्रहों की दृष्टि इन पर नहीं हो।
6. षष्ठेश 6, 12वें स्थान में हो और शनि की दृष्टि न हो तो बालक बधिर होता है।

मूक योग (बोलने में परेशानी) 
1. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि में गए हुए बुध को अमावस्या का चंद्रमा देखता हो। 
2. बुध और षष्ठेश दोनों एक साथ स्थित हो। 
3. गुरु और षष्ठेश लग्न में स्थित हो। 
4. वृश्चिक और मीन राशि में पापग्रह स्थित हो एवं किसी भी राशि के अंतिम अंशों में व वृषभ राशि में चंद्र स्थित हो और पापग्रहों से दृष्ट हो तो जीवनभर के लिए मूक तथा शुभग्रहों से दृष्ट हो तो पांच वर्ष की आयु तक बालक मूक होता है। 
5. क्रूर ग्रह संधि में गए हों, चंद्रमा पापग्रहों से युक्त हो तो भी व्यक्ति गूंगा होता है। 
6. शुक्ल पक्ष का जन्म हो और चंद्रमा, मंगल का योग लग्न में हो। 
7. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि में गया हुआ बुध चंद्र से दृष्ट हो, चौथे स्थान में सूर्य हो और छठे स्थान को पापग्रह देखते हो। 
8. द्वितीय स्थान में पापग्रह हो और द्वितीयेश नीच या अस्तगत होकर पापग्रहों से दृष्ट हो एवं सूर्य-बुध का योग सिंह राशि में किसी भी स्थान में हो। 
9. सिंह राशि में सूर्य-बुध दोनों एक साथ स्थित हो तो व्यक्ति मूक होता है।

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