
उज्जैन. ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य पूजन कर अर्घ्य देने और सूर्य की पूजा करने से सफलता प्राप्त होती है। अर्क पुराण के मुताबिक सूर्य भगवान की पूजा से परिवार में किसी भी सदस्य पर कोई मुसीबत या रोग नहीं आता। उम्र बढ़ती है और साथ ही भगवान आदित्य के आशीर्वाद से जीवन के अनेक दोष भी दूर हो जाते हैं। इससे प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है। इस दिन खाद्य वस्तुओं, वस्त्रों और गरीबों को दान देने से दोगुना पुण्य मिलता है।
कुंभ संक्रांति मुहूर्त
13 फरवरी, रविवार
शुभ मुहूर्त: सुबह 7:00 से दोपहर 12:35 तक (5 घंटे 34 मिनट)
महापुण्य काल: सुबह 7:00 से 8:55 तक (1 घंटा 53 मिनट)
इन 7 प्वाइंट्स से जानिए कुंभ संक्रांति का महत्व
1. ज्योतिष शास्त्र मे सूर्य को सभी ग्रहों का पिता माना गया है। सूर्य की उत्तरायण और दक्षिणायन स्थिति द्वारा ही जलवायु और ऋतुओं में बदलाव होता है। सूर्य की स्थिति अथवा राशि परिवर्तन ही संक्रांति कहलाती है।
2. हिन्दू धर्म मे संक्रांति का अत्यंत महत्व है। संक्रांति पर्व पर सूर्योदय से पहले स्नान और विशेषकर गंगा स्नान का अत्यंत महत्व है। ग्रंथों के अनुसार संक्रांति पर्व पर स्नान करने वाले को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है।
3. देवी पुराण में कहा गया है कि संक्रांति के दिन जो स्नान नहीं करता वो कईं जन्मों तक दरिद्र रहता है। संक्रांति के दिन दान और पुण्य कर्मों की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
4. सूर्य किसी भी राशि में करीब एक माह तक रहता है और उसके बाद दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। जिसे हिन्दू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र मे संक्रांति की संज्ञा दी गयी है।
5. मकर संक्रांति के बाद सूर्य मकर से कुंभ राशि में प्रवेश कर जाते हैं जिसे कुंभ संक्रांति कहा जाता है। हिन्दू धर्म में कुंभ और मीन संक्रांति को भी महत्वपूर्ण माना गया है। कुंभ संक्रांति पर स्नान-दान का विशेष महत्व है।
6. हिन्दू धर्म में पूर्णिमा अमावस्या और एकादशी तिथि का जितना महत्व है उतना ही महत्व संक्रांति तिथि का भी है। संक्रांति के दिन स्नान ध्यान और दान से देवलोक की प्राप्ति होती है। 7. कुंभ संक्रांति पर सुबह उठकर नहाने के पानी मे तिल जरूर डाल दें। नहाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। उसके बाद मंदिर जाकर श्रद्धा अनुसार दान करें।
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