
उज्जैन. स्कंद, पद्म और विष्णुधार्मोत्तर पुराण के मुताबिक शनैश्चरी अमावस्या पर तीर्थ स्नान या पवित्र नदियों में नहाने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इस पर्व पर किए गए दान से कई यज्ञ करने जितना पुण्य फल मिलता है। साथ ही इस अमावस्या पर किए गए श्राद्ध से पितर पूरे साल के लिए संतुष्ट हो जाते हैं।
20 साल बाद बनेगा ऐसा संयोग
जब कोई अमावस्या शनिवार को पड़ती है तो उसे शनिचरी अमावस्या कहा जाता है। आज अगहन महीने में साल 2021 की आखिरी शनैश्चरी अमावस्या है। शनिवार को अमावस्या का शुभ संयोग कम ही बनता है। आज से तीन साल पहले ऐसा संयोग 18 नवंबर 2017 को बना था। जब अगहन महीने की शनैश्चरी अमावस्या थी। अब 20 साल बाद यानी 23 नवंबर 2041 को अगहन महीने में शनैश्चरी अमावस्या का संयोग बनेगा।
अमावस्या कब से कब तक?
अगहन महीने की शनैश्चरी अमावस्या 3 दिसंबर को शाम तकरीबन 5 बजे से शुरू होगी जो शनिवार को दोपहर करीब 1.15 तक रहेगी। अगहन महीने में अमावस्या तिथि पर स्नान का महत्व ग्रंथों में बताया गया है। पद्म, मत्स्य और स्कंद पुराण में अमावस्या तिथि को पर्व कहा गया है। इसलिए इस दिन तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करने से हर तरह के दोष दूर हो जाते हैं।
शनि स्वराशि में इसलिए खास अमावस्या
ग्रंथों में बताया गया है कि शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देती है। इस तिथि पर तीर्थ स्नान और दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है। अमावस्या शनि देव की जन्म तिथि भी है। इसलिए इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष खत्म होते हैं। इस दिन शनि देव की कृपा पाने के लिए व्रत रखना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना चाहिए। ये शनैश्चरी अमावस्या खास इसलिए है क्योंकि शनि अपनी ही राशि यानी मकर में है।
पुण्य और मोक्ष प्राप्ति का पर्व
इस पर्व पर सुबह जल्दी नदी, सरोवर, पवित्र कुंड या तीर्थ में स्नान करना चाहिए। नहाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन व्रत रखकर जहां तक संभव हो मौन रहना चाहिए। जरूरतमंद व भूखे व्यक्ति को भोजन जरूर कराएं। शनैश्चरी अमावस्या पर ऊनी कपड़े या कंबल का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से शनि दोष तो दूर होते हैं साथ ही जाने अनजाने में हुए पाप भी खत्म हो जाते हैं।
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