
उज्जैन. पंचांग मुख्य रूप से पांच चीजों से मिलकर बना होता है। इसीलिए इसे पंचांग कहते हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। पुरातन समय में पंचांग हमारे दैनिक जीवन का एक अंग हुआ करता था, क्योंकि उस समय बहुत से काम पंचांग देखकर ही किए जाते थे। आज भी पंचांग के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। समय के साथ इसका महत्व और भी बढ़ता जा रहा है। आगे जानिए पंचांग से जुड़ी खास बातें…
आज करें नागदेवता की पूजा
धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 2 अगस्त, मंगलवार को है। इस दिन नागदेवता की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। ऐसा कहा जाता है नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिल जाती है। इस बार नागपंचमी पर धाता, सौम्य, शिव और सिद्ध नाम के 4 शुभ योग बन रहे हैं। नागपंचमी पर इतने सारे शुभ योगो में की गई पूजा हर कामना पूरी कर सकती है।
2 अगस्त का पंचांग (Aaj Ka Panchang 2 August 2022)
2 अगस्त 2022, दिन मंगलवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। इस दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। मंगलवार को सूर्योदय उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा जो शाम 05:29 तक रहेगा। इसके बाद हस्त नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। मंगलवार को पहले उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होने से धाता और उसके बाद हस्त नक्षत्र होने से सौम्य नाम के 2 शुभ योग इस दिन रहेंगे। साथ ही सिद्ध और शिव नाम के 2 अन्य शुभ योग भी इस दिन बन रहे हैं। राहुकाल दोपहर 03:48 से 05:26 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
मंगलवार को चंद्रमा कन्या राशि में, बुध सिंह राशि में, सूर्य कर्क राशि में, शुक्र मिथुन राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल-राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि निकलना पड़े तो गुड़ खाकर यात्रा पर जाना चाहिए।
2 अगस्त के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- शुक्ल
दिन- मंगलवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- उत्तरा फाल्गुनी और हस्त
करण- बव और बालव
सूर्योदय - 6:01 AM
सूर्यास्त - 7:04 PM
चन्द्रोदय - Aug 02 9:44 AM
चन्द्रास्त - Aug 02 10:12 PM
अभिजीत मुहूर्त - 12:07 PM – 12:59 PM
2 अगस्त का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 9:17 AM – 10:55 AM
कुलिक - 12:33 PM – 2:10 PM
दुर्मुहूर्त - 08:38 AM – 09:30 AM और 11:27 PM – 12:11 AM
वर्ज्यम् - 02:12 AM – 03:52 AM
मन का कारक है चंद्रमा
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। साथ ही यह माता, मस्तिष्क, बुद्धिमता, स्वभाव, जननेद्रियों, प्रजनन संबंधी रोगों का भी कारक है। चंद्रमा के मित्र ग्रह सूर्य और बुध है। चंद्रमा किसी भी ग्रह को अपना शत्रु नहीं मानता है। चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। वहीं चंद्र वृषभ राशि में उच्च स्थान प्राप्त करता है। चंद्र वृश्चिक राशि में होने पर नीच राशि में होते हैं। चंद्र का भाग्य रत्न मोती है। चंद्रमा मंगल, गुरु, शुक्र व शनि से सम संबंध रखते हैं।
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