
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे सौर मंडल 9 ग्रह हैं। ये सभी हमारे जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं। पंचांग में इस संबंध में जानकारी मिलती है। ज्योतिषियों के अनुसार हर साल का नया पंचांग बनाया जाता है, लेकिन ये अंग्रेजी कैलेंडर पर आधारित न होकर हिंदू नववर्ष पर आधारित होता है। ज्योतिषियों के अनुसार, पंचांग मुख्य रूप से 5 अंगों से मिलकर बनता है, इसीलिए इसे पंचांग कहते हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। आगे जानिए पंचांग से जुड़ी खास बातें…
22 सितंबर का पंचांग (Aaj Ka Panchang 22 september 2022)
22 सितंबर 2022, दिन गुरुवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पूरे दिन रहेगी। गुरुवार को सूर्योदय आश्लेषा नक्षत्र में होगा, जो दिन भर रहेगा। गुरुवार को आश्लेषा नक्षत्र होने से अमृत नाम का शुभ योग बनेगा। इसके अलावा शिव और सिद्ध नाम के 2 अन्य योग भी रहेंगे। इस दिन राहुकाल दोपहर 01:49 PM से 03:19 PM तक रहेगा।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
गुरुवार की रात चंद्रमा कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन सूर्य और बुध कन्या राशि में, शुक्र सिंह राशि में, मंगल वृष राशि में, शनि मकर राशि में (वक्री), राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दही या जीरा मुंह में डाल कर निकलें।
22 सितंबर के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- आश्विन
पक्ष-कृष्ण
दिन- गुरुवार
ऋतु- शरद
नक्षत्र- आश्लेषा
करण- कौलव और तैतिल
सूर्योदय - 6:19 AM
सूर्यास्त - 6:19 PM
चन्द्रोदय - Sep 22 2:49 AM
चन्द्रास्त - Sep 22 4:30 PM
अभिजीत मुहूर्त- 11:55 AM से 12:43 PM
22 सितंबर का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 6:19 AM – 7:49 AM
कुलिक - 9:19 AM – 10:49 AM
दुर्मुहूर्त - 10:19 AM – 11:07 AM, 03:07 PM – 03:55 PM
वर्ज्यम् - 02:57 PM – 04:40 PM
क्या होते हैं ये योग?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचांग के 5 अंग होते हैं- तिथि, योग, करण, वार और नक्षत्र। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमश: इस प्रकार हैं- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति। इनमें से कुछ शुभ और कुछ अशुभ फल प्रदान करते हैं।
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