
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र में पंचांग के विशेष महत्व है। सभी शुभ मुहूर्त आदि पंचांग से ही निकाले जाते हैं। भारत में कई तरह के पंचांग प्रचलित हैं। यह सर्वाधिक प्रसिद्ध पंचांग है विक्रम जो भारत के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भाग में प्रचलित है। इसके बाद तमिल का उपयोग किया जाता है जो दक्षिण भारत में प्रचलित है। बंगाल तथा कुछ अन्य पूर्वी भागों में बंगाली पंचांग प्रचलित है। मलयालम पंचांग केरल में प्रचलित है। हमारे आस-पास के देश नेपाल, कम्बोडिया, लाओस, थाईलैण्ड, बर्मा, श्रीलंका आदि में भी स्थानीय पंचांग का उपयोग किया जाता है। पंचांग के 5 प्रमुख अंग बताए गए हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
आज किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत
आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इसे योगिनी एकादशी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए, जिससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण के मुताबिक इस दिन व्रत या उपवास करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही कई यज्ञों को करने का फल भी मिलता है। इस व्रत का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। मान्यता है कि इस व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के पुण्य के बराबर है।
24 जून का पंचांग (Aaj Ka Panchang 24 June 2022)
24 जून 2022, दिन गुरुवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। इस दिन अश्विनी नक्षत्र में होगा, जो सुबह 11 बजे तक रहेगा, इसके बाद भरणी नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। शुक्रवार को पहले अश्विनी नक्षत्र होने से वज्र और उसके बाद भरणी नक्षत्र होने से मुग्दर नाम के 2 अशुभ योग इस दिन बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थसिद्धि नाम का शुभ योग भी रहेगा। राहुकाल सुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
शुक्रवार को चंद्रमा मेष राशि में, सूर्य मिथुन राशि में, बुध और शुक्र वृषभ राशि में, राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में, मंगल व गुरु मीन में और शनि कुंभ राशि में रहेंगे। शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो जौ या राईं खाकर घर से बाहर निकलें।
24 जून के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- आषाढ़
पक्ष- कृष्ण
दिन- शुक्रवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- अश्विनी और भरणी
करण- बव और बालव
सूर्योदय - 5:46 AM
सूर्यास्त - 7:11 PM
चन्द्रोदय - 2:10 AM
चन्द्रास्त - 3:17 PM
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12.02 से 12.56
24 जून का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 3:50 PM – 5:31 PM
कुलिक - 7:27 AM – 9:07 AM
दुर्मुहूर्त - 08:27 AM – 09:21 AM और 12:56 PM – 01:49 PM
वर्ज्यम् - 06:36 PM – 08:21 PM
बव करण में कर सकते हैं शुभ काम
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एक तिथि में दो करण होते हैं ये तिथि का आधा हिस्सा होते हैं। इनकी संख्या 11 होती है। इनके नाम इस प्रकार हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पद, नाग और किस्तुघन। इनमें से प्रारम्भ के 7 करण चर प्रकृति के हैं और बाकी के स्थिर है। वे एक चन्द्र माह में एक-एक बार आते है। पहला करण है बव। ये एक शुभ करण है, इसमें सगाई, विवाह, गृह निर्माण, गृह प्रवेश आदि शुभ काम किए जा सकते हैं। यात्रा आरंभ करने के लिए भी ये कारण विशेष शुभ माना जाता है।
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