
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्ल पक्ष में प्रथम तिथि प्रतिपदा कहलाती है। दूसरी तिथि को द्वितिया, तीसरी तिथि को तृतीया और इसी क्रम में चलते हुए अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहते हैं। कृष्ण पक्ष की शुरुआत भी प्रतिपदा से होती है और इसकी अंतिम तिथि अमावस्या होती है। हमारे देश में लगभग 30 प्रकार के पंचांग प्रचलित हैं। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, इन पांच अंगों के योग से पंचांग बनता है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
आज करें सोम प्रदोष व्रत
25 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार है और इस दिन त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष का व्रत भी किया जाएगा। सावन में सोम प्रदोष का संयोग बहुत ही कम बार बनता है। इसके अलावा इस दिन शश, हंस, अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि नाम के 2 अन्य शुभ योग भी बनेंगे। इस दिन भगवान शिव की पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं।
25 जुलाई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 25 July 2022)
25 जुलाई 2022, दिन सोमवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर लगभग 04.15 तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय मृगशिरा नक्षत्र में होगा, जो पूरे दिन रहेगा। सोमवार को मृगशिरा नक्षत्र होने से आनंद नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। इसके अलावा इस दिन धुव्र नाम का शुभ और व्याघात नाम का अशुभ योग भी बन रहा है। इस दिन राहुकाल सुबह 07:36 से 9:15 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
सोमवार को चंद्रमा वृषभ राशि से निकलकर मिथुन में प्रवेश करेगा। सूर्य-बुध कर्क राशि में, शुक्र मिथुन राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल-राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में और गुरु (वक्री) मीन राशि में रहेंगे। सोमवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि मजबूरी में यात्रा करनी पड़े तो शीशे में अपना चेहरा देखकर या कोई भी पुष्प खा कर घर से निकलना चाहिए।
25 जुलाई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- कृष्ण
दिन- सोमवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- मृगशिरा
करण- तैतिल और गर
सूर्योदय - 5:58 AM
सूर्यास्त - 7:08 PM
चन्द्रोदय - Jul 25 2:44 AM
चन्द्रास्त - Jul 25 4:48 PM
25 जुलाई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 10:54 AM – 12:33 PM
कुलिक - 2:12 PM – 3:50 PM
दुर्मुहूर्त - 12:59 PM – 01:52 PM और 03:37 PM – 04:30 PM
वर्ज्यम् - 10:34 AM – 12:22 PM
सिद्धि योग (Siddhi Yog)
ज्योतिष शास्त्र में 27 शुभ-अशुभ योगों के बारे में बताया गया है। ये पंचांग के 5 अंगों में से एक है। इनमें से इक्कीसवें योग का नाम सिद्धि है। वार, नक्षत्र और तिथि के बीच आपसी तालमेल होने पर सिद्धि योग का निर्माण होता है। उदाहरण स्वरूप सोमवार के दिन अगर नवमी अथवा दशमी तिथि हो एवं रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, श्रवण और शतभिषा में से कोई नक्षत्र हो तो सिद्धि योग बनता है। ये बहुत ही शुभ योग है। इस योग में किए गए सभी कामों में सफलता जरूर मिलती है।
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