
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, इन पांच अंगों के योग से पंचांग बनता है। पंचांग पुरातन समय से ही सनातम धर्म में कालगणना की व्यवस्था रहा है। इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएँ हैं- पहली चंद्र आधारित, दूसरी नक्षत्र आधारित और तीसरी सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति। पंचांग में शुभ मुहूर्त के अलावा गृह-नक्षत्र परिवर्तन से जुड़ी रोचक जानकारी भी आसानी से मिल जाती है। वर्तमान में कई तरह के पंचांग बाजार में आसानी से मिल जाते है, इनका आधार भी अलग-अलग ही होता है। वर्तमान में विक्रम संवंत से संबंधित पंचांग ही सबसे ज्यादा सटीक है। प्राचीन समय में पंचांग ही शुभ-अशुभ मुहूर्त देखने के लिए एकमात्र साधन हुआ करता था। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
26 मई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 26 May 2022)
26 मई 2022, दिन गुरुवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। इसे अचला एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाएगी।
इस दिन सूर्योदय रेवती नक्षत्र में होगा, जो पूरे दिन रहेगा। गुरुवार को रेवती नक्षत्र होने से मित्र नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है, इसके अलावा इस दिन गजकेसरी और आयुष्मान नाम के 2 अन्य शुभ योग भी इस दिन रहेंगे। इस दिन राहुकाल दोपहर 02:03 से 03:43 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
गुरुवार को चंद्रमा मीन राशि में, मंगल, गुरु और शु्क्र मीन में, सूर्य और बुध वृषभ राशि में, शनि कुंभ राशि में, राहु मेष राशि में और केतु तुला राशि में रहेंगे। गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दही या जीरा मुंह में डाल कर निकलें।
26 मई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- ज्येष्ठ
पक्ष- कृष्ण
दिन- गुरुवार
ऋतु- ग्रीष्म
नक्षत्र- रेवती
करण- बालव और कौलव
सूर्योदय - 5:46 AM
सूर्यास्त - 7:01 PM
चन्द्रोदय - 3:02 AM
चन्द्रास्त - 3:35 PM
अभिजीत मुहूर्त – 11:57 AM: 12:50 PM
26 मई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 5:45 AM – 7:25 AM
कुलिक - 9:04 AM – 10:44 AM
दुर्मुहूर्त - 10:11 AM – 11:04 AM और 03:29 PM – 04:22 PM
वर्ज्यम् - 10:08 PM – 11:52 PM
आज किया जाएगा अचला एकादशी का व्रत
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अचला और अपरा एकादशी कहते हैं। इस दिन ये एकादशी 26 मई, गुरुवार को है। धर्म ग्रंथों में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है। इससे धन लाभ के योग भी बनते हैं। इस बार अचला एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ गया है। अचला एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था।
32 तारों का समूह है रेवती नक्षत्र
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, रेवती नक्षत्र 32 तारों का समूह है, जो मृदंग की तरह दिखाई देता है। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों की राशि मीन होती है और इसका स्वामी बुध व राशि स्वामी गुरु बृहस्पति हैं। रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं। रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति ज्ञानी होता है, लग्न नक्षत्र स्वामी बुध नक्षत्र चरण स्वामी से शत्रुता रखता है। लक्ष्मी के अन्तिम नाम योग लक्ष्मी का संबंध, भचक्र के अन्तिम नक्षत्र रेवती से है। रेवती को शुभ परिवर्तन लाने वाला नक्षत्र कहते हैं।
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