
उज्जैन. दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह आदि के बारे में जानकारी मिलती है। इसलिए हिंदू कैलेंडर में पंचांग एक अनिवार्य हिस्सा है। पंचांग का उपयोग हमेशा ज्योतिष शास्त्र के लिए भी किया जाता है। भारत में कई तरह के पंचांग उपयोग में हैं, लेकिन सर्वाधिक प्रसिद्ध पंचांग है विक्रम, जो भारत के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भाग में प्रचलित है। इसके बाद तमिल का उपयोग किया जाता है जो दक्षिण भारत में प्रचलित है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
3 अगस्त का पंचांग (Aaj Ka Panchang 3 August 2022)
3 अगस्त 2022, दिन बुधवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। बुधवार को सूर्योदय हस्त नक्षत्र में होगा, जो शाम 06:43 तक रहेगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। बुधवार को पहले हस्त नक्षत्र होने से आनंद नाम का शुभ योग और इसके बाद चित्रा नक्षत्र होने से कालदण्ड नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है। इनके अलावा इस दिन सिद्ध और साध्य नाम के 2 अन्य शुभ योग भी रहेंगे। इस दिन राहुकाल दोपहर 12:33 से 02:10 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
बुधवार को चंद्रमा कन्या राशि में, बुध सिंह राशि में, सूर्य कर्क राशि में, शुक्र मिथुन राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल-राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि निकलना पड़े तो तिल या धनिया खाकर घर से बाहर निकलें।
3 अगस्त के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- शुक्ल
दिन- बुधवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- हस्त और चित्रा
करण- कौलव और तैतिल
सूर्योदय - 6:02 AM
सूर्यास्त - 7:03 PM
चन्द्रोदय - Aug 03 10:38 AM
चन्द्रास्त - Aug 03 10:44 PM
अभिजीत मुहूर्त – इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है।
3 अगस्त का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 7:39 AM – 9:17 AM
कुलिक - 10:55 AM – 12:33 PM
दुर्मुहूर्त - 12:07 PM – 12:59 PM
वर्ज्यम् - 02:32 AM – 04:09 AM
ज्योतिष शास्त्र में मंगल का महत्व
धर्म ग्रंथों में मंगल को देवताओं का सेनापति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये एक क्रूर ग्रह है। ये ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। मंगल को पराक्रम व ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसलिए इस ग्रह से प्रभावित लोग पराक्रमी होते हैं। जिसकी कुंडली में मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें व बारहवें स्थान पर होता है, उसे मांगलिक दोष होता है। इस कारण विवाह में देरी होने की संभावना रहती है। इसका निराकरण योग्य विद्वान से जरूर करवाना चाहिए।
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