Aaj Ka Panchang 7 मई 2022 का पंचांग: शनिवार को दिन भर रहेंगे 2 शुभ योग, इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा न करें

Published : May 07, 2022, 05:30 AM IST
Aaj Ka Panchang 7 मई 2022 का पंचांग: शनिवार को दिन भर रहेंगे 2 शुभ योग, इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा न करें

सार

शनिवार को पहले पुनर्वसु नक्षत्र होने से छत्र और उसके बाद पुष्य नक्षत्र होने से मित्र नाम के 2 शुभ योग इस दिन बन रहे हैं। शुक्रवार की रात से चंद्रमा कर्क राशि में आ चुका है। शनिवार को इसका असर सभी पर दिखाई देगा।

उज्जैन. हर धर्म का अपना एक अलग कैलेंडर होता है। हिंदू धर्म में इसे पंचाग कहते हैं। पंचांग में हर दिन के शुभ मुहूर्त, राहु काल, व्रत-त्योहार, ग्रह परिवर्तन आदि की पूरी जानकारी होती है। पंचांग वैदिक काल से ही सनातन धर्म में काल गणना का एक प्रमुख अंग रहा है। ज्योतिष और पंडित आदि सभी शुभ कामों के लिए मुहूर्त देखने के लिए पंचांगा का ही उपयोग करते हैं। वैसे तो हमारे देश में कई तरह के पंचांग प्रचलित है, लेकिन उन सभी में विक्रम पंचांग प्रमुख है। ज्योतिषियों की मानें तो ग्रह, नक्षत्र व कुछ बातों को ध्यान में रखकर एक पूर्ण सटीक पंचांग बनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचांग मुख्य रूप से 5 अंगों से मिलकर बनता है ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। जानिए इन पांच से जुड़ी खास बातें…

करण:  ये तिथि का आधा भाग होता है। ज्योतिष शास्त्र में कुल 11 करण बताए गए हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। 

तिथि: चन्द्र रेखांक को सूर्य रेखांक से 12 अंश ऊपर जाने के लिए जो समय लगता है, वह तिथि कहलाती है। एक तिथि 19 से 24 घंटे तक की हो सकती है। तिथि कुल 16 होती है प्रतिपदा से चतुर्दशी तक 14 और पूर्णिमा व अमावस्या।

नक्षत्र: ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों के बारे में बताया गया है। अश्विन, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती।

वार: एक सप्ताह में सात वार होते हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं- सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और रवि। ये सभी अलग-अलग ग्रहों और देवताओं से संबंधित होते हैं।

योग: नक्षत्र की ही तरह योग भी 27 प्रकार के होते हैं। इनमें कुछ योग शुभ होते हैं और कुछ अशुभ।

7 मई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 7 May 2022)
7 मई 2022, दिन शनिवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन सूर्योदय पुनर्वसु नक्षत्र में होगा, जो सुबह 09.20 तक रहेगा, इसके बाद पुष्य नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। शनिवार को पहले पुनर्वसु नक्षत्र होने से छत्र और उसके बाद पुष्य नक्षत्र होने से मित्र नाम के 2 शुभ योग इस दिन बन रहे हैं। इस दिन राहुकाल सुबह 09:08 से 10:46 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें। 

ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
शनिवार की सुबह चंद्रमा राशि बदलकर मिथुन से कर्क में आ चुका है। अन्य ग्रह  शुक्र और गुरु मीन राशि में, बुध ग्रह वृषभ राशि में, सूर्य और राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में और मंगल कुंभ राशि में और शनि कुंभ राशि में रहेगा। शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। पूर्व दिशा में यात्रा करना पड़े तो अदरक, उड़द या तिल खाकर घर से निकलें।

7 मई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत: 2079
मास पूर्णिमांत: वैशाख
पक्ष: शुक्ल
दिन: शनिवार
ऋतु: ग्रीष्म
तिथि: षष्ठी– दोपहर 02.56 तक, इसके बाद सप्तमी
नक्षत्र: पुनर्वसु और पुष्य
करण: तैतिल और गर
सूर्योदय - 5:53 AM
सूर्यास्त - 6:53 PM
चन्द्रोदय- 10:38 AM
चन्द्रास्त -12:37 AM
अभिजीत मुहूर्त:  11:57 AM से 12:49 PM

7 मई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 2:01 PM – 3:38 PM
कुलिक - 5:53 AM – 7:31 AM
दुर्मुहूर्त - 07:37 AM – 08:29 AM
वर्ज्यम् - 09:11 PM – 10:58 PM

कैसे करते हैं कालगणना?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 15 दिन-रात का 1 पक्ष माना गया है और दो पक्षों का एक मास। ये 2 पक्ष हैं शुक्ल जिसे उजाला भी कहते हैं और कृष्ण जिसे अंधियारा कहते हैं। ये पक्ष ही पितरों के दिन-रात कहलाते हैं। 2 मास की 1 ऋतु होती है और और 6 मास का 1 अयन होता है। अयन दक्षिणायन और उत्तरायन दो प्रकार का होता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है। मनुष्य लोक में ये 1 वर्ष या 12 महीने होते हैं।

इस समय चल रहा है राक्षस संवत्सर
कालगणना के अनुसार, वर्तमान में विक्रम संवंत् 2079 चल रहा है। अभी तक कलियुग के 5124 वर्ष बीत चुके हैं। कलियुग के आरंभ में 36000 वर्ष संध्याकाल का मान होता है। इस हिसाब से अभी कलियुग की संध्या के ही 30876 सौर वर्ष यानी साल बीतने बाकी हैं। पंचांग के अनुसार इस समय राक्षस संवत्सर चल रहा है जो शिवविंशति के अंतर्गत नौवां संवत्सर है। दशम इन्द्राग्नि युग में इसकी गणना चौथी है। इसके स्वामी इन्द्राग्नि और अधिष्ठातृ बृहस्पति देवता इसकी राशि व तुला व स्वामी श्री शुक्र हैं।
 

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