
उज्जैन. करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु व सुखी वैवाहिक जीनव की कामना के लिए निर्जला (बिना पानी के) उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करती हैं। इस बार करवा चौथ पर बहुत ही खास योग बन रहा है, जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
बनेगा ये शुभ योग
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार करवा चौथ पर चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में उदित होगा और इसी नक्षत्र में पूजा भी की जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह नक्षत्र बेहद ही शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं इसलिए माना जाता है कि इस नक्षत्र में चंद्रमा दर्शन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र में चंद्रोदय का शुभ संयोग 5 साल बाद बन रहा है। इसके अलावा रविवार को धाता नाम का एक अन्य शुभ योग भी बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा।
चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र का योग क्यों माना जाता है शुभ?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा की सत्ताईस पत्नियां थीं, जिन्हें हम नक्षत्र के रूप में जानते हैं। चंद्रमा अपनी रोहिणी नाम की पत्नी से अधिक प्रेम करते थे। अन्य पत्नियों ने जब ये बात अपने पिता दक्ष को बताई तो वे क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दे दिया। बाद में चंद्रमा ने भगवान की तपस्या से इस श्राप से मुक्ति पाई। इसलिए करवा चौथ पर चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र का योग बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि ये चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी है।
कब से कब तक रहेगी चतुर्थी तिथि?
कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि आरंभ- 24 अक्टूबर, रविवार की सुबह 03.01 मिनट से
कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि समाप्त- 25 अक्टूबर, सोमवार की सुबह 05.43 मिनट तक
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