
उज्जैन. एक ऐसा ही शुभ चिह्न है मछली का। हथेली में यह चिह्न जिस जगह मौजूद होता है उसके अनुसार परिणाम देता है। हथेली में अलग-अलग स्थान पर मछली का चिह्न होने के क्या परिणाम मिलते हैं, जानिए…
1. मछली का चिह्न गुरु पर्वत (तर्जनी अंगुली के नीचे) हो तो इस बात का संकेत है कि व्यक्ति अपने स्वयं के ज्ञान और बुद्धि के बल पर दुनिया पर राज करेगा। उसकी सफलता दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ेगी। ऐसा व्यक्ति अत्यंत धनवान होता है।
2. शनि पर्वत (मध्यमा अंगुली के नीचे) पर मछली का चिह्न होने का अर्थ है कि व्यक्ति बेहद ही न्यायप्रिय और अनुशासित होगा। ऐसा व्यक्ति रहस्यमयी विद्याओं का ज्ञाता होता है। दार्शनिक होता है और अपनी आजीविका इन्हीं चीजों से कमाता है। ऐसे व्यक्ति को शत्रु कभी परास्त नहीं कर पाते।
3. सूर्य पर्वत (अनामिका अंगुली के नीचे) पर मछली का चिह्न होने से व्यक्ति दुनियाभर में एक प्रसिद्ध व्यक्ति के रूप में नाम कमाता है। ऐसा व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी में देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। विश्व का बड़ा सम्मान इन्हें हासिल होता है।
4. बुध पर्वत (कनिष्ठिका अंगुली के नीचे) पर मछली का चिह्न होना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति एक सफल उद्योगपति बनेगा। ऐसा व्यक्ति अपनी कम्युनिकेशन स्किल के दम पर प्रसिद्धि पाएगा। ऐसे व्यक्ति का विवाह अत्यंत सफल होता है और पत्नी का सपोर्ट बिजनेस में मिलता है।
5. हथेली में चंद्र पर्वत (बुध पर्वत और मणिबंध के बीच का स्थान) पर मछली का चिह्न होना व्यक्ति को अत्यंत क्रिएटिव बनाता है। आर्ट, कल्चर के क्षेत्र में व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। विदेशों तक इसकी ख्याति फैलती है। ऐसा व्यक्ति समुद्रपारीय देशों में व्यापार करके धन अर्जित करता है।
6. शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे का भाग) पर मछली का चिह्न होने का अर्थ है व्यक्ति काफी आकर्षक, प्रभावी और रोमांटिक किस्म का होगा। उस व्यक्ति का आकर्षण हर किसी में होता है। यह कोई सेलिब्रिटी हो सकता है। भौतिक वस्तुओं की इसे कोई कमी नहीं होती।
7. केतु पर्वत मणिबंध रेखाओं के ऊपर होता है। यदि यहां पर मछली का चिह्न बना हुआ है तो व्यक्ति धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति का होता है। वह व्यक्ति इन्हीं चीजों के दम पर नाम और धन अर्जित करता है। यह स्थान महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि मछली यहां से मछली का मुंह जिस पर्वत की ओर होता है उस पर्वत के शुभ गुण भी व्यक्ति में आ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि केतु पर्वत पर मौजूद मछली का मुंह सूर्य पर्वत की ओर है तो व्यक्ति मान-सम्मान, पद, प्रतिष्ठा हासिल करेगा। यदि केतु पर्वत पर मछली का चिन्ह हो और वह उल्टा हो। यानी मछली का मुंह मणिबंध की ओर हो और पूंछ किसी पर्वत की ओर हो। तो जिस पर्वत की ओर मछली की पूंछ होती है उस पर्वत से संबंधित परिणाम मिलने में देरी होती है।
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