
उज्जैन. रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी जीवन की कामना करती हैं। बदलते समय के साथ बाजार में मिलने वाली राखी के रंग-रूप में भी परिवर्तन आ गया है। अब बाजार में कई रंग-बिरंगी, फैंसी और मंहगी राखियां उपलब्ध हैं। बहनें अपने भाइयों के लिए अच्छी से अच्छी राखी खरीदने की कोशिश करती हैं। लेकिन इस समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, नहीं तो इसका अशुभ प्रभाव भी हो सकता है। आगे जानिए राखी खरीदते और बांधते समय किन बातों का ध्यान रखें…
1. अशुभ चिह्न वाली राखी न खरीदें
आज-कल बाजार में कई फैंसी राखियां उपलब्ध हैं। अपने भाई के लिए राखी खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि उस पर किसी तरह का कोई अशुभ चिह्न न हो। इस तरह की राखियां खासतौर पर बच्चों के लिए बनाई जाती है जो उन्हें आकर्षित कर सके। ऐसी राखी भूलकर भी न खरीदें और न ही बांधें।
2. राखी में किसी देवी-देवता की तस्वीर न हो
बाजार में देवी-देवताओं की तस्वीर या चिह्न वाली राखियां भी आसानी से मिल जाती हैं। इस बात का ध्यान रखें इस तरह की राखियां आपके भाई की कलाई पर काफी समय तक बंधी रहती हैं जिसकी वजह से ये अपवित्र भी हो जाती है और बाद में कहीं गिर भी सकती है। इन दोनों ही स्थिति में भगवान का अपमान होता है, जिसका अशुभ परिणाम निकट भविष्य में भुगतना पड़ सकता है।
3. टूटी-फूटी राखी बांधने से बचें
कई बार जल्दबाजी में टूटी-फूटी या खंडित राखी भी खरीदने में आ जाती है। खंडित से अर्थ है जिसका धागा निकला हुआ हो या उस पर जो चिह्न हो वह कहीं से टूटा-फूटा हो। अगर भूल से ऐसी राखी आ भी जाए तो इसे भाई की कलाई पर न बांधें। हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के दौरान खंडित वस्तुओं की पूजा या उपयोग करने की मनाही है।
4. इस रंग की राखी भी न बांधें
रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यही प्यार उसकी राखी में भी झलकना चाहिए। इस दिन भूलकर भी काले रंग की राखी अपने भाई की कलाई पर न बांधें। क्योंकि ये रंग निगेटिविटी का प्रती है। शुभ कार्यों में भी इसका प्रयोग वर्जित माना गया है। इसलिए जिस राखी में काला धागा, काले चिह्न का प्रयोग किया गया हो, उसे न तो खरीदें और न ही बांधें।
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