
उज्जैन. पितृ दोष (Pitra dosh) के उपाय करने के लिए लोग श्राद्ध पक्ष (Shradh Paksha 2021) का इंतजार करते हैं क्योंकि मान्यता अनुसार इसी समय पितृ धरती पर आकर अपने परिजनों से जल और भोजन की आशा करते हैं। पितृ दोष क्या है, ये किन परिस्थितियों में बनता है और इसके उपाय आदि जानकारी इस प्रकार है…
कैसे बनता है पितृ दोष (Pitru dosh)?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में जब नवम भाव में राहु या केतु स्थित हो तो व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित माना जाता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि आपके पूर्वजों का कोई ऋण आपके ऊपर बाकी है या वे आपसे किसी तरह की आशा रखते हैं जो आप किसी कारणवश पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
पितृ दोष (Pitru dosh) से होने वाली समस्याएं
1. जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके यहां संतान होने में समस्याएं आती हैं या संतान नहीं होती। संतान हो जाए तो उनमें से कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं रहती।
2. जिन्हें पितृ दोष होता है, ऐसे लोगों के घर में धन की कमी रहती है। किसी न किसी रूप में धन की हानि होती रहती है।
3. जिन्हें पितृ दोष (Pitra dosh) होता है, उनके परिवार में शादी होने में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं। कुछ लोगों को शादी भी नहीं होती।
4. पितृ दोष के कारण घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता रहता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है।
5. अगर बार-बार व लंबे समय तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटना पड़े तो ये भी पितृ दोष का कारण हो सकता है।
6. पितृ दोष होने के कारण परिवार का एक न एक सदस्य हमेशा बीमार रहता है। यह बीमारी भी जल्दी ठीक नहीं होती।
पितृ दोष (Pitru dosh) के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
1. श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, शक्कर, सब्जी और दक्षिणा दान करें।
2. श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करे। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।
3. विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने मात्र से ही पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
4. श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को चारा खिला दे। इससे भी पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
5. सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुंचाएं और उन्हें तृप्त करें।
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