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6 अक्टूबर को गज छाया योग में करें पितरों का श्राद्ध, उन्हें मिलेगी मुक्ति और आपको सुख-समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गज छाया योग में श्राद्ध (Shradh Paksha 2021) करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। इस बार श्राद्ध पक्ष में 2 बार गज छाया योग बनने जा रहा है। इस योग में पितरों के निमित्त तर्पण करने से अक्षय तृप्ति मिलती है और उनकी मुक्ति हो जाती है।

Shradh Paksha, Gaj Chaya yog on 6th October, doing shradh in this can bring prosperity and give peace to deceased ancestors
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Ujjain, First Published Sep 25, 2021, 5:00 AM IST
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उज्जैन. जो व्यक्ति गज छाया योग में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसे कर्ज से मुक्ति मिलती है और उसको अपने गृहस्थ जीवन में अपार सफलता मिलती है। धन्य-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। पितरों का पूर्ण आशीर्वाद उनके साथ रहता है। ऐसा योग कई वर्षों में एक बार आता है। 

कब-कब बनेगा ये शुभ योग?
- इस वर्ष श्राद्ध पक्ष में यह योग आश्विन कृष्ण त्रयोदशी अर्थात 3 अक्टूबर को रात 10:39 से 4 अक्टूबर की सुबह 3:10 तक अर्थात लगभग 4:30 घंटे का रहेगा। क्योंकि इस समय अवधि में मघा नक्षत्र होगा और सूर्य हस्त नक्षत्र में होगा।
- इसके बाद 6 अक्टूबर को मध्य रात्रि 1:10 से दोपहर 4:34 बजे तक पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन बनेगा। 15 घंटे 20 मिनट तक का योग सर्वाधिक उत्तम कहा गया है क्योंकि इस दिन सूर्य और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में होंगे और सर्वपितृ अमावस्या का पुण्य पर्व है।
- इसमें सभी पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध करने से अपने पितरों को अक्षय मुक्ति की प्राप्ति होती है और श्राद्ध करने वाले को ऋण से मुक्ति, पारिवारिक उन्नति और संतान की उन्नति होती है।

इन शास्त्रों में लिखा है शुभ योग का वर्णन
- स्कंद पुराण, अग्नि पुराण, वराह पुराण और महाभारत में भी गज छाया योग का वर्णन है। कहा तो यह जाता है कि इस दिन किसी तीर्थ क्षेत्र में स्नान करने से तथा अपने पितरों के निमित्त जलांजलि देने से पितरों की तृप्ति होती है।
- गज छाया का एक अर्थ यह भी है कि किसी नदी किनारे हाथी की छाया में बैठकर अपने पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान से हमारे पितर संतुष्ट होते हैं और उन्हें पितृ योनि से मुक्ति मिल जाती है। उनके कृपा एव आशीर्वाद से उनके वंशजों को बहुत आशीर्वाद मिलते हैं।

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