
उज्जैन. 14 अप्रैल को खरमास खत्म होने और 17 को शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद इस साल शादियों के लिए 50 मुहूर्त रहेंगे, जिनमें अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त भी शामिल हैं। अप्रैल से शुरू हो रहा शादियों का दौर 15 जुलाई तक रहेगा। इसके बाद चातुर्मास लगने से मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाएंगे।
20 जुलाई से 15 नवंबर तक नहीं होंगे शुभ कार्य
इस साल 20 जुलाई को आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की देवशयनी एकादशी होने से वैवाहिक व अन्य मांगलिक काम नहीं हो पाएंगे। फिर 15 नवंबर को कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएगें। मई और जून में इस साल विवाह के लिए ज्यादा मुहूर्त हैं।
4 महीने में 37 शुभ मुहूर्त
अप्रैल से जुलाई तक शादियों के लिए कुल 37 मुहूर्त रहेंगे। इनमें पहला 22 अप्रैल को फिर 24 से 30 अप्रैल तक हर दिन विवाह मुहूर्त रहेगा। अगले महीने यानी मई में शादियों के लिए सबसे ज्यादा 15 दिन मिलेंगे। फिर जून में 9 और जुलाई में 5 दिन विवाह मुहूर्त हैं। इनमें 15 जुलाई को आखिरी मुहूर्त रहेगा। क्योंकि 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से शादियों पर रोक लग जाएगी।
नवंबर और दिसंबर में 13 दिन
जुलाई में देवशयन होने के बाद 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर विवाह मुहूर्त के साथ शादियों का दौर फिर शुरू हो जाएगा। इस महीने 15 में से सात दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। वहीं अगले महीने यानी दिसंबर में 15 तारीख के पहले तक शादियों के लिए सिर्फ 6 ही दिन मिलेंगे। क्योंकि 15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाने से मांगलिक कामों की मनाही होती है।
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