
लाइफस्टाइल डेस्क. क्रिसमस (Christmas 2022) आते ही बच्चों के मन में सांता क्लॉज़ (Santa Claus) और गिफ्ट से भरी झोली की तस्वीर सामने आ जाती है। क्रिश्चियन लोगों के साथ-साथ अन्य समुदाय के लोग भी इसे सेलिब्रेट करने लगे हैं। बच्चों को गिफ्ट देते हैं। माता-पिता अपने छोटे बच्चों को खुश करने के लिए गिफ्ट देते हैं। उन्हें खिलौने देते हैं। बच्चों के विकास में खिलौने अहम योगदान देते हैं। ऐसे में बच्चों को वैसे खिलौने नहीं देने चाहिए जो उनके विकास को बाधित करें। बच्चों को किस तरह के खिलौने पैरेंट्स को नहीं देने चाहिए इसके बारे में पूर्व प्ले थेरेपिस्ट बताती हैं। टिकटॉक पर @amysgiftideas से फेमस पूर्व थेरेपिस्ट ने बताया कि कौन से वो 4 खिलौने हैं जिसे बच्चों को नहीं देना चाहिए। आइए हम आपको बताते हैं, ताकि बच्चों के गिफ्ट के चुनाव के दौरान इन बातों का आप ख्याल रख सकें...
1.शोर वाले प्लास्टिक के खिलौने
पूर्व प्ले थेरेपिस्ट बताती हैं कि छोटे बच्चों को बहुत शोर करने वाले खिलौने नहीं देने चाहिए। बार-बार तेज आवाज में बजने से ये आपको डिस्टर्ब तो करेगा ही साथ ही ये बच्चों के लिए अच्छे नहीं होते हैं। स्टडीज से बता चला है कि ये बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं विशेषकर छोटे बच्चों के लिए। वे भाषा के विकास में देरी कर सकते हैं।
2.बहुत सारे टुकड़ों वाले खिलौनें (toys with a lot of pieces)
एमी ने माता-पिता को बहुत सारे "बहुत सारे टुकड़ों वाले खिलौनों" से दूर रहने की अपील करती हैं। वो बताती हैं कि बच्चे बहुत सारे ऑप्शन को संभाल नहीं पाते हैं। अध्ययन से पता चला है कि जब उनके पास बहुत सारे विकल्प होते हैं तो वो गड़बड़ा जाते हैं, या फिर अपना ध्यान खो देते हैं। वो विचलित हो जाते हैं। वो जब उसे जोड़ नहीं पाते हैं तो खिन्न हो जाते हैं।
3. बड़े खिलौने
एमी माता-पिता और उनके दादा-दादी को बड़े खिलौने देने से बचने के लिए कहती हैं। वो कहती हैं कि बड़े खिलौने बच्चों के खेलने के स्थान को घेर लेती हैं। उनके बाकी सारे छोटे टॉय उससे दब जाते हैं। वो कहती हैं कि तो मैं ऐसे खिलौने देना पसंद करती हूं जिन्हें आसानी से एक बिन में रखा जा सकता है। इतना ही नहीं वो बहुत महंगे होते हैं। बच्चों के अंदर दूसरों के खिलौने को देखकर अहंकार वाली भावना भी विकसित होती है।
4.ऐसे खिलौने जो इंस्ट्रक्शन के साथ आते हों
बच्चों को ऐसे खिलौने नहीं देने चाहिए जो इंस्ट्रक्शन के साथ आते हों। वो आगे उदाहरण देककर कहती हैं कि मैं एक बच्चे के लिए कपड़ा लेकर आऊं और बोलूं कि ये तो मैंने सोचा था कि तुम इसे स्कूल के पहले दिन पहनकर जाओगी। या फिर सॉफ्ट टॉय देकर कहूं कि ये तुम्हारे रात के सोने के लिए। बच्चों को ऐसे खिलौने दें जो उन्हें चुनने और क्रिएटिविटी करने की आजादी दें। वो इसे कब, कैसे इस्तेमाल करें वैसे टॉय उन्हें दें। या फिर ऐसे खिलौने मत दें जिसे वो 5 मिनट में खेलकर बोर हो जाएं।
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