
Thekua Prasad Recipe: छठ पूजा को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें निर्जला उपवास रखने के साथ-साथ प्रसाद तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी श्रमसाध्य होती है। ठेकुआ, जो इस व्रत का प्रमुख प्रसाद होता है, उसकी तैयारी की एक विशेष विधि होती है। इसमें बाजार से आटा खरीदकर नहीं, बल्कि घर पर ही गेहूं पीसकर आटा तैयार किया जाता है।
सबसे पहले नए फसल से तैयार ताज़ा गेहूं खरीदा जाता है। फिर उसे ध्यानपूर्वक साफ किया जाता है ताकि उसमें किसी अन्य अनाज, सरसों के दाने या कंकड़-पत्थर जैसी अशुद्धियां न रहें। इसके बाद गेहूं को पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। जहां धूप आती है, उस स्थान को पहले साफ किया जाता है और वहां पतला, स्वच्छ कपड़ा बिछाकर गेहूं को सुखाया जाता है। इस दौरान घर का कोई न कोई सदस्य वहां मौजूद रहता है ताकि गेहूं को कोई जानवर या पक्षी छू न सके या खा न सके। इस प्रकार पूरी तरह पवित्र गेहूं से ही प्रसाद बनाया जाता है।
जब गेहूं पूरी तरह सूख जाता है, तब उसे घर की जाटा (चक्की) में पीसा जाता है। यानी प्रसाद के लिए उपयोग होने वाला आटा घर में ही तैयार किया जाता है। इसी पवित्र आटे से ठेकुआ बनाया जाता है, जिसे श्रद्धा और भक्ति के साथ छठी मैया को अर्पित किया जाता है।
ठेकुआ बनाने के लिए सबसे पहले उस चूल्हे को तैयार किया जाता है, जो साफ-सुथरा और पवित्र हो। कई घरों में इसे मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है, क्योंकि यह पारंपरिक और शुद्ध माना जाता है।
एक साफ बर्तन में गुड़ को तोड़कर पानी के साथ चूल्हे पर रखा जाता है। फिर इसे हल्की आंच पर पिघलाकर चाश्नी बनाई जाती है। ध्यान रहे कि गुड़ की चाश्नी को ज़्यादा गाढ़ा या हार्ड नहीं करना है, बस हल्की चिपचिपी रखनी है।
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अब गेहूं के आटे में शुद्ध गाय का घी मिलाया जाता है। फिर तैयार की गई गुड़ की चाश्नी से आटे को गूंथा जाता है। स्वाद और सुगंध के लिए इसमें थोड़ा इलायची पाउडर भी डाला जा सकता है। इसके बाद ठेकुआ को सांचे की मदद से आकार दिया जाता है।
पीतल की कड़ाही में घी गर्म किया जाता है। फिर धीमी आंच पर एक-एक करके ठेकुआ डाला जाता है और सुनहरा भूरा होने तक तला जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि ठेकुआ जले नहीं और दोनों तरफ से समान रूप से सिके।
तले हुए ठेकुआ को ऐसी पवित्र जगह पर रखा जाता है, जहां बच्चे या जानवर उसे छू न सकें। शाम और सुबह के अर्घ्य के समय ठेकुआ को फलों और अन्य प्रसाद के साथ छठी मैया को अर्पित किया जाता है। सुबह के अर्घ्य के बाद यही ठेकुआ प्रसाद रूप में बांटा जाता है। व्रती महिलाएं ठेकुआ प्रसाद खाकर ही अपना व्रत खोलती हैं।
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