
आजकल बाजार में मिलने वाली लगभग हर खाने की चीज में मिलावट हो रही है। असली क्या है और नकली क्या, यह पहचानना मुश्किल हो गया है। तरबूज भी इससे अछूता नहीं है। आपने कई लोगों से सुना होगा कि तरबूज में इंजेक्शन लगाया जाता है। हो सकता है यह हर जगह न हो, लेकिन कुछ जगहों पर ऐसा हो रहा है। तरबूज को ज्यादा लाल दिखाने, जल्दी पकाने, खराब होने से बचाने और आकर्षक बनाने के लिए इसमें इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
आप जब भी बाजार से तरबूज लाएं, तो उसे खाने से पहले एक बार जांच जरूर लें।
• तरबूज काटने पर अगर वह बहुत ज्यादा गहरा लाल या हर तरफ से एक जैसा लाल दिखे, तो सावधान हो जाएं।
• एक गिलास पानी में तरबूज का एक छोटा टुकड़ा डालें। अगर पानी का रंग लाल होने लगे, तो समझ जाइए कि इसमें इंजेक्शन लगा है।
• कटे हुए तरबूज पर एक साफ सफेद कपड़ा रगड़कर भी आप सच्चाई जान सकते हैं। अगर कपड़े पर रंग लग जाए, तो मान सकते हैं कि इसे रंगने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल हुआ है।
• अगर तरबूज से अजीब गंध आए या उसका स्वाद सामान्य से अलग लगे, तो उसे बिल्कुल न खाएं।
• तरबूज को काटने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।
• बाजार में पहले से कटे हुए रखे फल खाने की गलती न करें। इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है।
• बाजार से लाया गया तरबूज अक्सर काफी गर्म होता है। उसे पहले सामान्य तापमान पर आने दें। अगर जल्दी है, तो खाने से कुछ देर पहले उसे सादे पानी में डुबोकर रख दें। इसके बाद ही काटकर खाएं।
गर्मियों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। गर्मियों में सेहतमंद रहने के लिए हमेशा साफ और ताजे फल ही खाएं। फल खाने के बाद अगर उल्टी, चक्कर आना या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
तरबूज में पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है। यह ब्लड प्रेशर कम करने और नर्वस सिस्टम के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें विटामिन बी6 भी होता है, जो शरीर को प्रोटीन पचाने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम व नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है। तरबूज में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, जो आपको हाइड्रेटेड रखता है।
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