
Uttarakhand Traditional Recipes: हर साल 9 नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस खूबसूरत राज्य के जन्म का प्रतीक है जो न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और देवभूमि की आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने पहाड़ी संस्कृति और व्यंजनों के लिए भी मशहूर है। पहाड़ की रसोई की खासियत यहां के स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है, यहां के व्यंजन स्थानीय अनाज, दालों और मसालों से बनते हैं, जो शरीर को न सिर्फ एनर्जी देते हैं, बल्कि शरीर को गर्माहट देते हैं। तो चलिए इस स्थापना दिवस पर जानते हैं उत्तराखंड की 5 पारंपरिक और ऑथेंटिक रेसिपी, जिनसे आप इस दिन को और भी खास बना सकते हैं।
उत्तराखंड की सबसे लोकप्रिय और पौष्टिक डिशों में से एक है भट्ट की चुड़कानी। यह व्यंजन काले भट्ट से बनाया जाता है, जिसे धीमी आंच पर मसालों, प्याज और टमाटर के साथ पकाया जाता है। इसका स्वाद थोड़ा नटी और मिट्टी जैसा होता है, जो ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखता है। इसे गरम-गरम चावल या गेहूं की रोटी के साथ खाया जाता है।
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झोली उत्तराखंड का एक क्लासिक करी डिश है, जो दही और बेसन से तैयार किया जाता है। इसमें सरसों का तड़का और लहसुन का फ्लेवर इसे एक अनोखा स्वाद देता है। पहाड़ों में लोग इसे ठंडे मौसम में खास तौर पर बनाते हैं क्योंकि इसमें प्रोटीन और कैल्शियम की भरपूर मात्रा में होती है। गरम झोली और भात पहाड़ी घरों का पसंदीदा खाना है।
अगर आप उत्तराखंड के असली स्वाद की तलाश में हैं तो कांदे की भुजणी जरूर ट्राई करें। इसे भुने हुए चावल के आटे और प्याज के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें हरी मिर्च और धनिया का स्वाद इसे और लाजवाब बनाता है। यह हल्का और स्वादिष्ट स्नैक शाम की चाय के साथ परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।
झंगोरा, यानी कि बर्नयार्ड मिलेट, उत्तराखंड का प्रमुख अनाज है, जिससे बनी झंगोरे की खीर पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। दूध, चीनी और इलायची के साथ पकाई गई यह खीर हल्की और स्वादिष्ट होती है। इसे खास मौकों जैसे स्थापना दिवस या त्योहारों पर बनाया जाता है। यह डिश हेल्थ-कॉन्शस लोगों के लिए भी बेस्ट है क्योंकि इसमें ग्लूटेन नहीं होता।
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अनर्सा उत्तराखंड का पारंपरिक मीठा स्नैक है जो चावल, गुड़ और तेल से बनाया जाता है। इसका स्वाद जलेबी और पुए के बीच का होता है, और यह लंबे समय तक खराब नहीं होता। इसलिए इसे ट्रेवल या पर्व-त्योहारों पर खास तौर पर बनाया जाता है। पहाड़ी घरों में आज भी अर्सा को प्रेम और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
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