
अगर आपके पौधों की नई पत्तियां मुड़ने लगी हैं, फल और फूल सही तरीके से नहीं ग्रो कर रहे हैं या टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसे पौधों में ब्लॉसम और रॉट की समस्या है, तो इसकी वजह कैल्शियम की कमी हो सकती है। ऐसे में हर बार महंगे फर्टिलाइजर खरीदने की जरूरत नहीं है। घर में मिलने वाला चूना (स्लेक्ड लाइम/खाने वाला चूना) सीमित मात्रा में इस्तेमाल करके पौधों की कैल्शियम की जरूरत पूरी की जा सकती है। हालांकि इसका उपयोग सही मात्रा में करना बेहद जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा मिट्टी का pH बढ़ा सकती है।
कैल्शियम पौधों की सेल्स को मजबूत बनाने और नई जड़ों व पत्तियों के डेवलपमेंट के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर नई पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं, पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फल खराब होने लगते हैं। लंबे समय तक एक ही मिट्टी का यूज, असंतुलित खाद और ज्यादा बारिश भी कैल्शियम की कमी का कारण बन सकते हैं।
पौधों के लिए खाने वाला चूना (स्लेक्ड लाइम) या बागवानी में यूज होने वाला कृषि चूना कैल्शियम का अच्छा सोर्स है। इसे बहुत कम मात्रा में मिट्टी में मिलाया जाता है ताकि पौधों को धीरे-धीरे कैल्शियम मिल सके। तेज असर के लिए अधिक मात्रा डालने की गलती नहीं करनी चाहिए।
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लगभग 8 से 10 इंच के गमले में आधा से एक चम्मच चूना मिट्टी की ऊपरी परत में हल्के हाथ से मिलाएं और बाद में पानी दें। इसका उपयोग बार-बार करने की बजाय 2 से 3 महीने के अंतराल पर करें। यदि मिट्टी पहले से बेसिक है तो इसका प्रयोग करने से पहले जांच कर लें।
चूने को कभी भी जरूरत से ज्यादा मात्रा में न डालें। इसे यूरिया या अमोनियम आधारित खाद के साथ एक ही समय पर मिलाने से बचें। पौधों की स्थिति देखते हुए ही इसका उपयोग करें और समय-समय पर ऑर्गेनिक खाद, कंपोस्ट और बैलेंस पोषक तत्व भी देते रहें, ताकि पौधों की ग्रोथ बनी रहे।
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