
मोरिंगा यानी सहजन का पौधा सेहत के साथ-साथ आपके घर के गार्डन की खूबसूरती भी बढ़ा सकता है। इसकी पत्तियों और फलियों का इस्तेमाल कई तरह की सब्जियों और व्यंजनों में किया जाता है। अच्छी बात यह है कि इसे बड़े बगीचे की बजाय गमले में भी उगाया जा सकता है। सही गमला, उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल से आप घर पर सहजन का पौधा तैयार कर सकते हैं। जानिए इसे उगाने के आसान तरीके।
मोरिंगा का पौधा गमले में लगाने के लिए कम से कम 18–24 इंच गहरा और चौड़ा गमला चुनें। बड़े गमले में इसकी जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। गमले में पानी निकलने के लिए ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए। प्लास्टिक, मिट्टी या सीमेंट का गमला इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि पौधे को बढ़ने के साथ पर्याप्त जगह मिले और जड़ों में पानी जमा न हो।
मोरिंगा के बेहतर विकास के लिए ऐसी मिट्टी चुनें जिसमें पानी आसानी से निकल जाए। इसके लिए सामान्य गार्डन मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट और थोड़ी मोटी रेत मिला सकते हैं। मिट्टी को बहुत ज्यादा भारी या चिकनी न रखें। गमले में लगाने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करें, ताकि जड़ों को हवा मिले और पौधा तेजी से विकसित हो सके।
मोरिंगा को बीज या शाखा की कटिंग से उगाया जा सकता है। बीज को लगभग 1–2 सेंटीमीटर गहराई में लगाकर हल्का पानी दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। कटिंग से उगाने पर स्वस्थ और उपयुक्त शाखा चुनें। बीज से उगा पौधा सामान्यतः बेहतर जड़ व्यवस्था विकसित कर सकता है। पौधा लगाने के लिए गर्म मौसम और अच्छी जल निकासी वाली जगह चुनें।
मोरिंगा को अच्छी बढ़त के लिए रोजाना लगभग 6–8 घंटे धूप की जरूरत होती है। गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिले। मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर पानी दें। जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं। बरसात में गमले में पानी जमा होने से बचाएं। नियमित रूप से पौधे की पत्तियों और नई शाखाओं की जांच करें, ताकि किसी समस्या का समय रहते पता चल सके।
पौधे की सक्रिय वृद्धि के दौरान हर कुछ सप्ताह में थोड़ी मात्रा में कंपोस्ट डालें। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद देने से पत्तियों की बढ़त तो अधिक हो सकती है, लेकिन फूल और फलियां प्रभावित हो सकती हैं। सूखी या रोगग्रस्त शाखाओं को हटाएं और पौधे को पर्याप्त जगह दें। मोरिंगा में फूल और फलियां आने में कुछ महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। फलियां मिलने का समय पौधे की किस्म, मौसम, धूप और देखभाल पर निर्भर करता है।
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