
मंदिर में भगवान को चढ़ाए गए फूल और पूजा के बाद बची सामग्री को अक्सर कूड़े में फेंक दिया जाता है। लेकिन इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करके गार्डन के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है। सूखे फूल मिट्टी में ऑर्गेनिक सब्सटेंस बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, जबकि थोड़ी-सी राख मिट्टी में मिलाई जा सकती है।
मंदिर से उतारे गए फूलों को सीधे गमले की मिट्टी में डालने के बजाय पहले अच्छी तरह सुखा लें। फूलों को साफ जगह पर फैलाकर धूप में रखें, ताकि उनमें मौजूद नमी निकल जाए। पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें हाथ से थोड़ा तोड़ या मसल सकते हैं। इससे फूल जल्दी मिट्टी में मिलेंगे और ऑर्गेनिक खाद की तरह काम करेंगे।
गमले की ऊपरी मिट्टी को हल्का-सा भूर-भूरा करें और सूखे फूलों की एक पतली परत मिट्टी के नीचे मिला दें। इसके ऊपर मिट्टी की हल्की परत डाल दें। फूल धीरे-धीरे सड़कर ऑर्गेनिक पदार्थ में बदलेंगे। बहुत ज्यादा फूल एक साथ डालने से बचें, क्योंकि इससे मिट्टी में सड़न या फंगस की समस्या बढ़ जाएगी।
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दीपक में जल चुकी सूती बाती, माचिस की तिली और अगरबत्ती की पूरी तरह जली हुई राख को इकट्ठा कर लें। इन्हें जलाने के लिए अलग से आग लगाने की जरूरत नहीं है, पूजा के बाद बची पूरी तरह जली सामग्री की राख ही इस्तेमाल करें। राख को बहुत थोड़ी मात्रा में मिट्टी की ऊपरी सतह पर छिड़कें और हल्का मिला दें।
राख का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना जरूरी है। ज्यादा राख मिट्टी का pH बढ़ा सकती है, जिससे कुछ पौधों को नुकसान हो सकता है। साथ ही अगरबत्ती या माचिस की ऐसी राख न डालें जिसमें प्लास्टिक, रंगीन कोटिंग, मेटल या सिंथेटिक मटेरियल हों। फूलों को भी तभी गमले में डालें जब वे पूरी तरह सूखे और साफ हों।
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