बादाम का छिलका निकालकर खाएं या नहीं? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

Published : Sep 13, 2024, 03:46 PM IST

बादाम सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसे छीलकर खाना चाहिए या नहीं? आयुर्वेद के अनुसार, बादाम को भिगोकर छीलने से उसकी गर्मी कम होती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है।

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ड्राई फ्रूट्स में बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ होते हैं। उनमें बादाम का एक खास स्थान है। बादाम खाने से पेट देर तक भरा रहता है। इसलिए वजन कम करने की चाहत रखने वाले लोग रोजाना सुबह भीगे हुए बादाम खाते हैं। पेट भरा होने का एहसास भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है। बादाम में मौजूद पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए मददगार होते हैं। बादाम के पोषक तत्व युवा दिखने में मदद करते हैं। 

बादाम का स्वाद नापसंद करने वाले बहुत कम ही होते हैं। बच्चे हों या बड़े, बादाम सभी को अच्छे परिणाम देते हैं। रोजाना बादाम खाने से दिमाग की कार्यक्षमता में सुधार होता है। इससे याददाश्त तेज होती है। बादाम को सर्दियों में ऐसे ही खाया जा सकता है।

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लेकिन, गर्मी के दिनों में इसे रात में भिगोना चाहिए। इसे छीलकर सुबह खाना ही अच्छा होता है। क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार बादाम को गर्मी पैदा करने वाला  भोजन माना जाता है। इसे रात में भिगोने से गर्मी कम करने में मदद मिलती है। 

अब आप जान गए होंगे कि गर्मियों में बादाम को भिगोकर खाने का एक कारण होता है। इसी तरह बादाम को छीलकर खाने के भी कुछ कारण होते हैं। इसमें बच्चों और बड़ों को भी इसे छीलकर ही खाना चाहिए। ऐसा क्यों है, यहां जानिए। 

बादाम के पोषक तत्व: 

बादाम में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और फाइबर पाए जाते हैं। इससे बालों और त्वचा को पोषण मिलता है। बादाम के छिलके में फाइबर होता है। यह भी अच्छे परिणाम देता है।

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पुराने शोध बताते हैं कि बादाम को पानी में भिगोने के बाद उसे छीलकर खाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि बादाम को पानी में भिगोने के बाद उसमें टैनिन नामक तत्व मिल जाता है। पुराने शोध बताते हैं कि इसे हटाकर खाने से बादाम की पूरी शक्ति हमारे शरीर को मिलती है।  

हालांकि, हाल ही में किए गए शोध बताते हैं कि बादाम को छिलके सहित खाने से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। बादाम को बिना छिले खाने से शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। इससे शरीर को विटामिन ई और फाइबर मिलता है।

बच्चों और बड़ों को इससे क्यों बचना चाहिए? 

सभी आयु वर्ग के लोगों का पाचन तंत्र एक जैसा नहीं होता है। प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली और वातावरण के अनुसार पाचन क्रिया होती है। बच्चों और बड़ों का पाचन तंत्र थोड़ा धीमा होता है। अगर ये लोग बादाम को छिलके सहित खाते हैं तो उन्हें पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

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इसलिए बादाम को भिगोकर छीलकर खाना चाहिए। छिले हुए बादाम भी सेहत के लिए अच्छे होते हैं। अगर पाचन क्रिया ठीक हो और स्वस्थ हों तो बादाम को बिना छिले भी कोई भी खा सकता है। 

बादाम को छीलने के सामान्य कारण: 

बादाम के छिलके में एमिग्डालिन होता है। यह कड़वा स्वाद दे सकता है। छीलने पर यह कड़वाहट दूर हो जाती है। इसलिए इसे खाना आसान हो जाता है। 

बादाम का छिलका सख्त होता है। कुछ लोग इसे पचा नहीं पाते हैं। छिलका उतारने से यह आसानी से पच जाता है। 

बादाम के छिलके में फाइटिक एसिड पाया जाता है। यह पोषक तत्वों के अवशोषण को रोकता है। इसलिए छिलका उतारने से फाइटिक एसिड कम हो जाता है। इससे विटामिन ई, मैग्नीशियम और  पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ावा मिलता है। इसलिए बादाम को छीलकर खाने की सलाह दी जाती है। बादाम को छीलने से यह मुलायम हो जाता है। इसे खाने में स्वादिष्ट लगता है।

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